Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हाल ही में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी (SFC) की एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के औद्योगिक परिदृश्य, कृषि-व्यवसाय (एग्री-बिजनेस) और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) सेक्टर को नई ऊंचाइयां देने के लिए कई दूरदर्शी और रणनीतिक निर्णय लिए गए।
सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य को निवेश का एक प्रमुख केंद्र बनाना और इसके साथ ही जमीनी स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोलना है। आइए इस बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णयों और नीतियों के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।
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तीन प्रमुख नीतियों को मिला प्रोत्साहन योजनाओं का विस्तार

बैठक के दौरान राज्य सरकार की तीन सबसे महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी नीतियों से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं को आगे बढ़ाने पर मुहर लगाई गई। ये नीतियां इस प्रकार हैं। इस नीति का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र को उद्योगों से जोड़ना और खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) इकाइयों को बढ़ावा देना है। छोटे और मध्यम उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने तथा उनके निर्यात (एक्सपोर्ट) को प्रोत्साहित करने के लिए इस नीति की योजनाओं को गति दी जाएगी।
मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026: और बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए इस नीति के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों को सुचारू रूप से लागू किया जाएगा।
युवाओं के लिए रोजगार और किसानों को बेहतर बाजार

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान कुछ प्रमुख प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान दिया जाना बेहद आवश्यक है, राज्य में आने वाले हर नए निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अधिकतम अवसर पैदा होने चाहिए। उद्योगों और कौशल विकास के बीच तालमेल बिठाया जाएगा ताकि हरियाणा के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर नौकरियां मिल सकें।
एग्री-बिजनेस पॉलिसी के तहत किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर और लाभकारी बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगने से किसानों को अपनी फसलों के सड़ने या औने-पौने दामों पर बेचने की समस्या से निजात मिलेगी और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
राज्य के उद्योगों को वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करने के लिए एक अनुकूल, सुगम और प्रतिस्पर्धी व्यावसायिक माहौल प्रदान किया जाएगा। इज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यवसाय सुगमता) को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा ताकि निवेशकों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अड़चन का सामना न करना पड़े।

हरियाणा सरकार की यह पहल राज्य को आर्थिक रूप से और अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। इन नीतियों के माध्यम से एक तरफ जहां औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई ताकत मिलेगी।
इन योजनाओं के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हरियाणा देश के सबसे प्रगतिशील और औद्योगिक रूप से समृद्ध राज्यों की सूची में अपनी स्थिति को और मजबूत करे। सरकार के इन ठोस कदमों से आने वाले समय में राज्य के विकास को एक नई गति और दिशा मिलने की पूरी उम्मीद है।
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