Haryana News: हरियाणा के यमुनानगर जिले के दामला इलाके में लंबे समय से बदहाल और टूटी पड़ी सड़क की गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय निवासियों और किसानों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। सड़क की इस दयनीय स्थिति से त्रस्त होकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने यह कड़ा ऐलान किया था कि जब राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस मार्ग से गुजरेंगे, तो उनके काफिले को रोककर क्षेत्र की खस्ताहाल सड़क का दर्द दिखाया जाएगा। किसानों के इस तीखे तेवर और विरोध प्रदर्शन के ऐलान से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और स्थानीय अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए।
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प्रशासनिक हलचल और भारी पुलिस बल की तैनाती
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर द्वारा मुख्यमंत्री का काफिला रोके जाने की चेतावनी के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए रादौर के डीएसपी सुनील कुमार के नेतृत्व में भारी पुलिस बल को तैनात किया गया। स्थानीय थानों की पुलिस ने भाकियू के जिला कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया, ताकि मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ा कोई संकट खड़ा न हो और काफिला सुरक्षित रूप से निकल सके।
टकराव टालकर खुद किसानों के बीच पहुँचे मुख्यमंत्री
स्थिति की नजाकत को समझते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक बेहद संवेदनशील और अनूठा कदम उठाया। जैसे ही उन्हें किसानों के विरोध प्रदर्शन के ऐलान और दामला की टूटी सड़क की समस्या के बारे में पता चला, उन्होंने अपने तय कार्यक्रम में बदलाव करते हुए खुद अपना काफिला रुकवा दिया। मुख्यमंत्री बिना किसी प्रशासनिक दूरी के सीधे भारतीय किसान यूनियन के जिला कार्यालय जा पहुंचे और वहाँ मौजूद किसानों से आमने-सामने बैठकर बातचीत की।
किसानों ने रखी अपनी बात, सीएम ने दिया भरोसा
किसान संगठन और स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने दामला क्षेत्र की खस्ताहाल सड़क की पूरी जमीनी हकीकत रखी। उन्होंने बताया कि इस सड़क के गड्ढों के कारण रोजाना राहगीरों, स्कूली बच्चों और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बेहद शांत भाव से किसानों की पूरी बात ध्यानपूर्वक सुनी और उनकी समस्याओं को जायज ठहराया। उन्होंने तुरंत मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए भरोसा दिलाया कि इस सड़क का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द शुरू करवाया जाएगा।
प्रशासनिक संवेदनशीलता की चर्चा और जनता की उम्मीदें
जिस गंभीर मुद्दे पर किसान आंदोलन करने और मुख्य सड़क पर काफिला घेरने की पूरी तैयारी कर चुके थे, उसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री के खुद चलकर किसानों के बीच पहुँच जाने से सारा तनाव छट गया और माहौल शांत हो गया। इस अप्रत्याशित पहल से किसानों ने भी राहत की सांस ली है। हालांकि, अब पूरे इलाके के लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया यह आश्वासन धरातल पर कितनी जल्दी उतरता है और कब तक इस खस्ताहाल सड़क का निर्माण कार्य पूरा होता है।
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