Haryana News: हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की कृषि विकास अधिकारी (ADO) भर्ती परीक्षा में एक प्रश्न के उत्तर में किए गए बदलाव को लेकर दायर याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि स्वतंत्र विशेषज्ञ निकायों द्वारा तय किए गए उत्तरों में अदालतें अपनी तरफ से हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं।
Haryana News: हरियाणा की तहसीलों में लगा ब्रेक, डिजिटल सिस्टम के विरोध
क्या था पूरा मामला और याचिकाकर्ता की दलीलें?
यह पूरा विवाद कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में कृषि विकास अधिकारी (प्रशासनिक कैडर) के पदों पर भर्ती से जुड़ा है।
भर्ती विज्ञापन: HPSC द्वारा 24 जून 2022 को इस भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। नियमों के अनुसार, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए लिखित परीक्षा में 50 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 45 प्रतिशत अंक लाना साक्षात्कार (Interview) के लिए अनिवार्य था।
प्रश्न संख्या 48 का विवाद: याचिकाकर्ता कमल दीप ने 16 अक्टूबर 2022 को परीक्षा दी थी। उन्हें प्रश्न पुस्तिका की सीरीज ‘सी’ मिली थी। प्रश्न संख्या 48 के उत्तर में उन्होंने विकल्प ‘ए’ चुना था।
उत्तर कुंजी में बदलाव: 27 अक्टूबर 2022 को जारी प्रारंभिक उत्तर कुंजी में कमल दीप द्वारा चुना गया विकल्प ‘ए’ सही माना गया था। हालांकि, जब 22 दिसंबर 2022 को परिणाम आया, तो उन्हें 49.16 प्रतिशत अंक मिले और 50 प्रतिशत की पात्रता पूरी न होने के कारण उनका चयन नहीं हुआ। इसके बाद 2 फरवरी 2023 को जारी अंतिम उत्तर कुंजी में उसी प्रश्न का सही उत्तर बदलकर विकल्प ‘डी’ कर दिया गया, जिससे उनका वह अंक कट गया।
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में दलील दी कि अंतिम उत्तर कुंजी परिणाम आने के बाद जारी हुई, जिससे उन्हें उस बदलाव के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने का मौका नहीं मिला। इसके अलावा, एक प्रतिष्ठित संस्थान की अध्ययन सामग्री का हवाला देते हुए उन्होंने अपने उत्तर को सही ठहराया।
हाई कोर्ट का स्पष्ट निर्णय और कानूनी रुख
मामلات की सुनवाई करते हुए जस्टिस निधि गुप्ता की अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग को ठुकरा दिया। अदालत ने अपने फैसले में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे:
विशेषज्ञों के निर्णय पर दखल नहीं: अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ निकाय द्वारा आपत्तियों की जांच के बाद तैयार की गई संशोधित उत्तर कुंजी और उसके आधार पर घोषित परिणाम में अदालतें अपनी राय प्रतिस्थापित नहीं कर सकतीं।
सहानुभूति के आधार पर राहत नहीं: कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल सहानुभूति या करुणा के आधार पर उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन का निर्देश नहीं दिया जा सकता। किसी एक अभ्यर्थी की व्यक्तिगत शिकायत के कारण पूरी चयन प्रक्रिया को बाधित या खतरे में नहीं डाला जा सकता।
प्रक्रियागत त्रुटि: इसके अलावा, अदालत ने पाया कि आयोग पहले ही सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की सिफारिश कर चुका था, लेकिन याचिकाकर्ता ने याचिका दायर करते समय उन अनुशंसित अभ्यर्थियों को पक्षकार नहीं बनाया था, जिससे याचिका तकनीकी रूप से भी दोषपूर्ण थी। इन सभी परिस्थितियों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कमल दीप की याचिका को खारिज कर दिया।
Haryana News: हरियाणा TET का परिणाम घोषित, सिर्फ 16.57% उम्मीदवार










