Haryana News: हरियाणा में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं के कारण आए दिन होने वाले सड़क हादसों पर रोक लगाने के लिए लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) ने एक बेहद व्यापक और सख्त निगरानी तंत्र तैयार किया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और यह पता लगाना है कि आखिर किन कारणों से पशु बार-बार सड़क पर पहुंचते हैं। इस व्यापक योजना के तहत विभाग ने सड़क और किलोमीटर के हिसाब से उन सभी संवेदनशील हिस्सों की पहचान कर ली है, जहां हादसों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
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सड़क और कारण के साथ तय की गई अधिकारियों की जिम्मेदारी
विभाग द्वारा तैयार की गई यह सूची केवल संवेदनशील स्थानों की पहचान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हर मार्ग की पूरी जानकारी दर्ज की गई है। इसमें सड़क का नाम, उसकी श्रेणी, कुल लंबाई, पशुओं की मौजूदगी वाला किलोमीटर, नोडल अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता (JE) और फील्ड कर्मचारियों के नाम व मोबाइल नंबर शामिल हैं।
इसके साथ ही, कई स्थानों पर यह भी विशेष रूप से दर्ज किया गया है कि पशुओं के सड़क पर आने की मुख्य वजह क्या है। इस नई व्यवस्था से न केवल राजमार्गों पर पशुओं की निगरानी बेहतर होगी, बल्कि किसी खास स्थान पर बार-बार पशु दिखने पर संबंधित स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही भी सख्ती से तय की जा सकेगी।
नूंह, रोहतक और हिसार समेत कई जिलों में हॉटस्पॉट चिन्हित
इस सर्वे के दौरान विभिन्न जिलों में बेसहारा पशुओं के जमावड़े के मुख्य कारणों का भी खुलासा हुआ है:
नूंह और गुरुग्राम: गुरुग्राम-अलवर राष्ट्रीय राजमार्ग-248ए पर नूंह शहर के पास फल और बिरयानी की दुकानों के कारण आवारा पशुओं व कुत्तों के सड़क पर आने की बात सामने आई है। इसके अलावा फिरोजपुर झिरका में सब्जी मंडी और दोहा चौक के पास भी इसी तरह की समस्या दर्ज की गई है।
रोहतक और भिवानी: रोहतक-भिवानी-लोहारू राजमार्ग पर लाहली गांव के पास पशु आहार की दुकान और गोशाला के बाहर पशुओं की मौजूदगी पाई गई है। भिवानी शहर, कलानौर, जुई और लोहारू में भी सब्जी मंडियों व फलों की रेहड़ियों के आसपास पशुओं के जुटने के कारण हादसों का जोखिम बढ़ रहा है।
हिसार और सिरसा: हिसार, हांसी, फतेहाबाद और सिरसा के कई प्रमुख मार्गों जैसे सरदूलगढ़-सिरसा-ऐलनाबाद मार्ग और रतिया-फतेहाबाद सेक्शन पर विशेष निगरानी दल और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
कैथल, पंचकूला और झज्जर में खास व्यवस्था
कैथल और जींद जिलों के कई प्रमुख मार्गों पर भी संवेदनशील हिस्सों की पहचान कर जिम्मेदारी तय की गई है। पंचकूला के पिंजौर बाईपास और पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ मार्ग पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।
दूसरी ओर, इस सूची की एक खास बात यह भी है कि सभी सड़कों को खतरनाक नहीं माना गया है। झज्जर-सुबाना-कोसली और झज्जर-बहादुरगढ़ जैसे कई हिस्सों के सामने ‘Nil’ (शून्य) दर्ज किया गया है, जो यह दर्शाता है कि विभाग ने पूरी पारदर्शिता और वास्तविक स्थिति के आधार पर ही जोखिम वाले क्षेत्रों को चिन्हित किया है।
जोखिम-मैपिंग से मजबूत होगा प्रशासनिक तंत्र
बेसहारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए बनाई गई यह जोखिम-मैपिंग योजना प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा कदम है। इसका उद्देश्य केवल पशुओं को सड़क से हटाना नहीं, बल्कि मंडियों, ढाबे, पशु आहार केंद्रों और गोशालाओं जैसे मूल कारणों पर अंकुश लगाना है। इस व्यवस्था से राजमार्गों पर सफर करने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा पुख्ता होगी और सड़क हादसों में काफी हद तक कमी आएगी।
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