Haryana News: हरियाणा सरकार राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और कारोबार की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक सुधार करने जा रही है। इसके तहत सरकार एक नया “ओम्निबस बिल” (सर्वग्राही विधेयक) लाने की तैयारी में है। इस विधेयक के माध्यम से अलग-अलग विभागों से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को एकीकृत कानूनी ढांचे में शामिल किया जाएगा, जिससे व्यवसायिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
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उच्च स्तरीय बैठक में हुई समीक्षा
चंडीगढ़ में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इस बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक और मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने की। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विभाग प्रमुखों ने 28 प्राथमिकता वाले सुधार क्षेत्रों में अब तक की प्रगति की समीक्षा की। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाना है।
कारोबारियों को मिलेगी बड़ी राहत
इस प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद कारोबारियों को विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अभी तक कई मामलों में लाइसेंस और एनओसी प्राप्त करने में लंबा समय लग जाता है, जिससे उद्योग और निवेश प्रभावित होता है। नए सिस्टम के तहत अनावश्यक औपचारिकताओं और देरी को खत्म करने की योजना है।
सरकार का लक्ष्य है कि सभी प्रकार की व्यावसायिक मंजूरी अधिकतम 30 दिनों के भीतर प्रदान की जाए। इसके लिए एक स्पष्ट सर्विस लेवल एग्रीमेंट लागू किया जाएगा, जिससे हर विभाग की जवाबदेही तय होगी।
डिजिटल सिस्टम और निगरानी व्यवस्था
पूरी मंजूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए एक आधुनिक डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा। इस प्रणाली के माध्यम से आवेदन की स्थिति की रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी
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MSME और उद्योगों के लिए सुधार
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर के लिए भी कई महत्वपूर्ण सुधार किए जा रहे हैं। इसके तहत औद्योगिक प्लॉट के उप-विभाजन, व्यावसायिक गतिविधियों में बदलाव, संपत्ति हस्तांतरण और सब-लीज जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। कई मामलों में पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता को भी समाप्त किया जा रहा है।
भूमि उपयोग और स्व-घोषणा प्रणाली
प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्रों में चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) की अनिवार्यता पहले ही समाप्त कर दी गई है, जबकि बाकी क्षेत्रों में भी इसे स्वचालित प्रणाली में बदलने की तैयारी है। हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट के तहत उद्यमी अब स्व-घोषणा के आधार पर अपना काम शुरू कर सकेंगे, जिससे उद्योग शुरू करने की प्रक्रिया और सरल हो जाएगी।
औद्योगिक विकास के लिए फंड और सिंगल विंडो सिस्टम
पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास के लिए सरकार ने लगभग 500 करोड़ रुपये का विशेष फंड प्रस्तावित किया है। इसके साथ ही निर्माण क्षेत्र में कई अनावश्यक एनओसी को खत्म करने की योजना भी है। हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र को एक मजबूत सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि निवेशकों और उद्यमियों को सभी सेवाएं एक ही स्थान पर मिल सकें।










