Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार ने ‘मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना’ के प्रभावी संचालन हेतु 170 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। यह कदम राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को कुपोषण से मुक्त कर स्वस्थ और मजबूत बनाना है। इस योजना को सामाजिक और स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है।
पोषण सुधार की दिशा में अहम योजना
इस योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 1 से 6 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को कम करना है। लाभार्थियों को साल में 300 दिनों तक फोर्टिफाइड स्किम्ड मिल्क पाउडर उपलब्ध कराया जाएगा। यह सामान्य दूध नहीं है, बल्कि इसमें विटामिन-ए और विटामिन-डी3 जैसे आवश्यक पोषक तत्व शामिल किए गए हैं, जो बच्चों के शारीरिक विकास और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बेहद जरूरी हैं।
स्वाद और पोषण का संतुलन
योजना को और आकर्षक बनाने के लिए दूध पाउडर को कई फ्लेवर में उपलब्ध कराया गया है, जैसे चॉकलेट, वेनिला, स्ट्रॉबेरी और केसर-बादाम। इसका उद्देश्य बच्चों और महिलाओं को पोषण के साथ-साथ स्वाद भी प्रदान करना है, ताकि वे इसे नियमित रूप से उपयोग करें।
Haryana News: भाजपा नेता मैनपाल अलीपुरा निर्विरोध चुने गए चेयरमैन, जगविंदर सिंह बने वाइस चेयरमैन
लाभार्थियों की पहचान और डिजिटल निगरानी

सरकार ने इस योजना के तहत लाभार्थियों की पहचान के लिए व्यापक अभियान चलाया है। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों से अब तक करीब 9.92 लाख लोगों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इस स्क्रीनिंग के जरिए उन महिलाओं और बच्चों को चिन्हित किया गया है जो कुपोषण के उच्च जोखिम में हैं, ताकि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ दिया जा सके।
पारदर्शिता के लिए डिजिटल सिस्टम
पूरी वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर अनियमितता या लीकेज न हो।
ग्राम स्तर पर निगरानी व्यवस्था
सरकार ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को भी शामिल किया है। अब गांव स्तर पर महिलाओं और बच्चों के पोषण की स्थिति की नियमित समीक्षा की जाएगी। ग्राम सभाओं की बैठकों में पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को अनिवार्य किया गया है, जिससे जमीनी स्तर पर जागरूकता और जवाबदेही बढ़ सके।
दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में कदम
इस योजना का अंतिम उद्देश्य राज्य में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को कम करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान सही पोषण मिलने से शिशु का जन्म वजन संतुलित रहता है और प्रसव संबंधी जटिलताओं में भी कमी आती है। सरकार का यह प्रयास न केवल वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति को सुधारने की दिशा में है, बल्कि भविष्य में एक स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण की नींव भी रखता है।
Haryana News: जजपा प्रवक्ता को गन प्वाइंट पर उठाने का आरोप, CIA-2 इंचार्ज पर कार्रवाई की मांग









