Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। मरीजों की सुरक्षित, भरोसेमंद और मानकों के अनुरूप चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हरियाणा स्टेट एलाइड एंड हेल्थकेयर काउंसिल का गठन किया गया है। यह काउंसिल स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखेगी और सुनिश्चित करेगी कि केवल प्रशिक्षित एवं योग्य विशेषज्ञ ही सेवाएं प्रदान करें।
सरकार ने पीजीआईएमएस रोहतक के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार सिंघल को इस काउंसिल का चेयरमैन नियुक्त किया है। स्थायी परिषद के गठन तक यह काउंसिल एडहॉक आधार पर कार्य करेगी और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगी।
क्या होती हैं एलाइड हेल्थ सर्विसेज?
एलाइड हेल्थ सर्विसेज ऐसे स्वास्थ्य पेशेवरों का समूह है, जो डॉक्टरों के साथ मिलकर मरीजों के उपचार को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी सेवाएं केवल इलाज तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि जांच, निदान, पुनर्वास और मरीजों की देखभाल में भी अहम योगदान होता है।
इस श्रेणी में मेडिकल लैब टेक्नीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, रेडियोलॉजी विशेषज्ञ, ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन, एनेस्थीसिया टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट, डाइटिशियन, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट विशेषज्ञ और अन्य तकनीकी स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। मरीजों की जांच, रिपोर्ट तैयार करने, फिजियोथेरेपी, पोषण संबंधी सलाह और तकनीकी उपचार प्रक्रियाओं में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
आचार संहिता और गुणवत्ता पर होगी सख्त निगरानी
नई काउंसिल का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में नैतिकता और गुणवत्ता बनाए रखना है। परिषद यह सुनिश्चित करेगी कि सभी एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स निर्धारित आचार संहिता और पेशेवर मानकों का पालन करें। यदि कोई स्वास्थ्यकर्मी नियमों का उल्लंघन करता है या अनियमितता में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में संबंधित व्यक्ति का नाम राज्य के आधिकारिक रजिस्टर से भी हटाया जा सकता है, जिससे वह भविष्य में सेवाएं देने के लिए अयोग्य माना जाएगा।
शिक्षा, प्रशिक्षण और लाइसेंसिंग व्यवस्था होगी मजबूत
काउंसिल केवल स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एलाइड हेल्थ शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार करेगी। इसके तहत पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, परीक्षा प्रणाली, शोध कार्य, शिक्षकों की योग्यता और संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं के न्यूनतम मानकों की नियमित समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा डिप्लोमा से लेकर पीएचडी स्तर तक प्रवेश के लिए समान प्रवेश परीक्षा, कॉमन काउंसलिंग और लाइसेंस प्राप्त करने के लिए एक समान एग्जिट परीक्षा लागू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इससे पूरे राज्य में शिक्षा और प्रशिक्षण का स्तर एक समान बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मरीजों को कैसे मिलेगा सीधा लाभ?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को प्रशिक्षित, प्रमाणित और योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सेवाएं मिल सकेंगी। इससे गलत उपचार, फर्जी डिग्री वाले लोगों और बिना प्रशिक्षण के इलाज करने वालों पर प्रभावी रोक लगेगी। अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित होगा, जिससे उपचार प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी। साथ ही मरीजों का भरोसा भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर पहले से अधिक मजबूत होगा।
विशेषज्ञों की भागीदारी से बनेगी प्रभावी व्यवस्था
सरकार ने काउंसिल में विभिन्न स्वास्थ्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया है। मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी, रेडियोलॉजी, न्यूट्रिशन, ट्रॉमा केयर, मेडिकल इक्विपमेंट टेक्नोलॉजी और हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सहित करीब 10 प्रमुख क्षेत्रों के विशेषज्ञ परिषद का हिस्सा होंगे। साथ ही काउंसिल के कामकाज को प्रभावी बनाए रखने के लिए स्पष्ट नियम भी तय किए गए हैं। यदि कोई नामित सदस्य लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
Haryana News: यमुनानगर-जगाधरी से बिहार-पंजाब जाने वालों को राहत, स्पेशल ट्रेन की अवधि बढ़ी
स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ेगा भरोसा
हरियाणा सरकार का यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई काउंसिल के गठन से प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों को बढ़ावा मिलेगा, फर्जी प्रैक्टिस पर अंकुश लगेगा और मरीजों को अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।










