Haryana: हरियाणा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के हित में एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार ने मकान, वाहन, कंप्यूटर और विवाह ऋण देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के माध्यम से लोन देने की व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब 1 जून 2026 से कर्मचारियों को ये सभी ऋण सीधे राज्य सरकार के बजट से उपलब्ध करवाए जाएंगे।
सरकार के इस फैसले को हाल ही में मंत्रिमंडल की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके बाद वित्त विभाग ने आधिकारिक रूप से नई व्यवस्था को लागू करने की घोषणा कर दी है। इस बदलाव को कर्मचारियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्हें ब्याज दरों और लोन की शर्तों में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है।
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2016 से पीएनबी के जरिए मिल रहा था लोन
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2016 में कर्मचारियों को दिए जाने वाले इन ऋणों का पूरा पोर्टफोलियो पंजाब नेशनल बैंक को सौंप दिया था। इसके बाद लगभग दस वर्षों तक सरकारी कर्मचारियों को मकान, वाहन, कंप्यूटर और विवाह से जुड़े ऋण बैंक के माध्यम से ही उपलब्ध कराए जाते रहे।
अब सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त करते हुए फैसला लिया है कि आगे से ये लोन सीधे सरकारी खजाने से दिए जाएंगे। इससे कर्मचारियों को बैंकिंग प्रक्रियाओं और अतिरिक्त औपचारिकताओं से राहत मिलने की संभावना है।
वित्त विभाग ने जारी किए निर्देश
7 मई 2026 को जारी आदेश में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि पात्र कर्मचारियों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक बजट विभागों को जारी किया जाएगा। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को अधिक पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के माध्यम से ऋण सुविधा मिलेगी। इससे लोन स्वीकृति में तेजी आएगी और कर्मचारियों को कम ब्याज दरों का लाभ भी मिल सकता है।
पुराने लोन की ईएमआई पहले की तरह जारी रहेगी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों ने 31 मई 2026 तक पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से ऋण लिया है, उनकी ईएमआई और पुनर्भुगतान की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। जब तक सरकार और बैंक के बीच वित्तीय मिलान पूरी तरह नहीं हो जाता, तब तक पुराने लोन का भुगतान पीएनबी को ही किया जाएगा। यानी पहले से चल रहे लोन पर इस बदलाव का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
राजपत्र में प्रकाशित हो चुकी है अधिसूचना
इस नई व्यवस्था से संबंधित अधिसूचना 2 अप्रैल 2026 को हरियाणा सरकारी राजपत्र में प्रकाशित की जा चुकी है। इसके बाद अब वित्त विभाग ने इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सरकारी कर्मचारियों के बीच इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। माना जा रहा है कि इससे कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ कम होगा और उन्हें बेहतर शर्तों पर ऋण उपलब्ध हो सकेगा।










