Haryana News: हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने राज्य में मृतकों की गरिमा और उनके परिजनों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हर जिले में शव वाहन की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही इस व्यवस्था की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।
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फरीदाबाद की घटना से उठा बड़ा सवाल
यह कार्रवाई फरीदाबाद के बादशाह खान सिविल अस्पताल में हुई एक दर्दनाक घटना के बाद की गई। एक महिला की मृत्यु के पश्चात उसके परिजनों को आर्थिक तंगी के कारण शव को मोटर चालित ठेले पर ले जाना पड़ा। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया। आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे मानवीय संवेदनाओं और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
संविधान के अधिकारों पर जोर
आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन तथा दीप भाटिया शामिल थे, ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार केवल जीवित व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति को सम्मान और गरिमा मिलनी चाहिए। आयोग ने कहा कि इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ रहा है।
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सरकार को दिए गए प्रमुख निर्देश
मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए मुफ्त शव परिवहन सेवा की नीति बनाई जाए
- सभी सरकारी अस्पतालों में शव वाहन की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए
- अस्पताल के स्टाफ को इस विषय में संवेदनशील और जागरूक बनाया जाए
- हर जिले में कम से कम एक कार्यशील शव वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
जागरूकता की कमी भी बड़ी समस्या

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि फरीदाबाद के अस्पताल में रेड क्रॉस के माध्यम से शव वाहन उपलब्ध था, लेकिन जानकारी के अभाव में परिजन इसका उपयोग नहीं कर सके।
आयोग ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि केवल सुविधा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों तक उसकी जानकारी पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।
अस्पतालों में सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं पर जोर
आयोग ने मृतशालाओं के बाहर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा, आधुनिक कोल्ड रूम स्थापित करने पर जोर दिया गया है ताकि शवों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से रखा जा सके।
यह कदम अस्पतालों की व्यवस्था को बेहतर बनाने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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रिपोर्ट जमा करने की समयसीमा
सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया गया है कि वे 13 अगस्त 2026 से पहले अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपें। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाना होगा कि उनके जिले में शव वाहन की उपलब्धता और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं कैसी हैं।










