Haryana Congress: हरियाणा की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद हरियाणा कांग्रेस के भीतर चल रहा अंतर्कलह अब सड़कों पर आ गया है। चुनाव में किसी तरह अपनी सीट बचाने में कामयाब रही कांग्रेस को अब संगठन के स्तर पर बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे ने न केवल पार्टी आलाकमान को चौंका दिया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में एक नए शक्ति समीकरण के संकेत भी दे दिए हैं। चुनाव में हारते-हारते बची कांग्रेस के लिए यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं है।
रामकिशन गुर्जर का इस्तीफा और क्रॉस वोटिंग का साया
रामकिशन गुर्जर का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर जांच तेज हो गई है। दरअसल, रामकिशन गुर्जर नारायणगढ़ से कांग्रेस विधायक शैली चौधरी के पति हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान शैली चौधरी का नाम उन विधायकों की सूची में प्रमुखता से उभरा है, जिन्होंने कथित तौर पर पार्टी लाइन से हटकर ‘क्रॉस वोटिंग’ की थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई को भांपते हुए गुर्जर ने पद छोड़ना ही बेहतर समझा। यह इस्तीफा पार्टी के भीतर मचे घमासान का सीधा परिणाम माना जा रहा है।
विधायक शैली चौधरी भी दे सकती हैं इस्तीफा: सूत्रों का दावा
रामकिशन गुर्जर के इस्तीफे के बाद अब सबकी निगाहें उनकी पत्नी और विधायक शैली चौधरी पर टिकी हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि गुर्जर के पद छोड़ने के बाद शैली चौधरी भी जल्द ही कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और विधायकी से इस्तीफा दे सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस की संख्या बल पर असर पड़ेगा। सूत्रों का कहना है कि क्रॉस वोटिंग के आरोपों के बाद शैली चौधरी खुद को पार्टी में अलग-थलग महसूस कर रही हैं और वह अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई बड़ा और कड़ा फैसला ले सकती हैं।
गुटबाजी की भेंट चढ़ती हरियाणा कांग्रेस
हरियाणा कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी का शिकार रही है। राज्यसभा चुनाव ने इस दरार को और गहरा कर दिया है। एक तरफ जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का खेमा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के अन्य पदाधिकारी और विधायक उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। रामकिशन गुर्जर का जाना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्षों के बीच तालमेल की भारी कमी है। संगठन के शीर्ष स्तर पर हो रहे इन इस्तीफों ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की तैयारियों और एकजुटता के दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस आलाकमान के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती
रामकिशन गुर्जर के इस्तीफे ने दिल्ली में बैठे कांग्रेस आलाकमान की नींद उड़ा दी है। हरियाणा एक ऐसा राज्य है जहाँ कांग्रेस वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ता विद्रोह उनकी उम्मीदों पर पानी फेर सकता है। अब पार्टी के सामने दोहरी चुनौती है: पहली, क्रॉस वोटिंग करने वाले बागियों पर कार्रवाई करना और दूसरी, संगठन को बिखरने से बचाना। यदि समय रहते इन मतभेदों को नहीं सुलझाया गया, तो नारायणगढ़ जैसे मजबूत गढ़ में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिन हरियाणा की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।









