Haryana News: हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की सटीक निगरानी के लिए बड़ा कदन उठाया है। इसके तहत 23 नए कंटीन्यूअस एंबियंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (CAAQMS) स्थापित किए जाएंगे। इससे हवा की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और समय रहते जरूरी कदम उठाने में मदद मिलेगी। जुलाई 2026 तक इन स्टेशनों की संख्या 29 से बढ़ाकर 52 करने का लक्ष्य रखा गया है।
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प्रदूषण नियंत्रण के लिए बहु-आयामी रणनीति
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में प्रदूषण को 30-35 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य के साथ विभिन्न विभागों की योजनाओं की समीक्षा की गई। इस दौरान यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि सभी विभाग मिलकर एक समन्वित रणनीति के तहत काम करें, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास अधिक प्रभावी बन सकें।
डस्ट-फ्री सड़कों का विकास
एनसीआर के नगर निगमों और गुरुग्राम, फरीदाबाद तथा सोनीपत के विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कम से कम पांच प्रमुख सड़कों को चिन्हित करें और उन्हें “मॉडल डस्ट-फ्री रोड” के रूप में विकसित करें। इससे सड़क धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
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प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती
व्यस्त सड़कों पर विशेष जांच अभियान चलाकर अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, एनसीआर के प्रमुख जिलों में डीजल ऑटो लगभग पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। बाकी क्षेत्रों में भी इन्हें 31 दिसंबर 2026 तक चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना है।
स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा
“नया सफर” योजना के तहत लगभग 1.9 लाख पुराने ट्रकों और 16,000 बसों को हटाकर उनकी जगह बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, राज्य में कैब और राइड-शेयरिंग सेवाओं को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही नई एग्रीगेटर पॉलिसी लागू की जाएगी।
उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय
राज्य के 889 औद्योगिक इकाइयों को निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (CEMS) लगाने के निर्देश दिए गए थे, जिनमें से 871 इकाइयों ने इसे स्थापित कर लिया है और 735 इकाइयां नियमित रूप से डेटा साझा कर रही हैं। सभी बड़े और मध्यम उद्योगों को जुलाई 2026 तक और छोटे उद्योगों को सितंबर 2026 तक अपने प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को अपग्रेड करने के निर्देश दिए गए हैं।
पराली जलाने में बड़ी कमी
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, वर्ष 2016 की तुलना में धान की पराली जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत से अधिक कमी दर्ज की गई है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आई है। साथ ही, लगभग 13,000 सीआरएम (Crop Residue Management) मशीनों की कमी को भी पहचाना गया है, जिसे धान कटाई के मौसम से पहले पूरा करने की योजना है।
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समग्र प्रयासों से मिलेगा स्वच्छ वातावरण
हरियाणा सरकार के ये कदम दर्शाते हैं कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक और ठोस रणनीति अपनाई जा रही है। विभिन्न विभागों के समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग और सख्त नियमों के जरिए राज्य में स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।









