Haryana Assembly: हरियाणा की राजनीति में आज का दिन उथल-पुथल भरा रहा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा बुलाए गए एकदिवसीय विशेष सत्र की कार्यवाही हंगामेदार रही। सत्र की शुरुआत जहाँ शोक प्रस्तावों के साथ हुई, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन की कार्यवाही का पूर्ण बहिष्कार कर सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
Haryana News: यमुनानगर में गर्मी का कहर, 40°C पार तापमान से सड़कों पर सन्नाटा
सदन का बहिष्कार और कांग्रेस की रणनीति
सत्र शुरू होने से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कांग्रेस विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि पार्टी सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेगी। कांग्रेस का तर्क है कि सरकार का रवैया लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
निंदा प्रस्ताव पर टकराव
विवाद की मुख्य जड़ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ है। भाजपा सरकार सदन में कांग्रेस के खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। सरकार का आरोप है कि कांग्रेस महिला आरक्षण के मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही है और उसका रुख विरोधाभासी है। दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक आफताब अहमद का कहना है कि उनकी पार्टी सभी राज्यों और लोकसभा में तत्काल प्रभाव से 33 फीसदी आरक्षण लागू करने की पक्षधर है, जिसे भाजपा घुमा-फिराकर पेश कर रही है।
ग्रुप-D कर्मचारियों के लिए बड़ी सौगात
राजनीतिक गतिरोध के बीच, सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सत्र में ‘हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल 2026’ पेश किया गया है। इस विधेयक के पारित होने से ग्रुप-D कर्मचारियों के करियर में बड़े बदलाव आएंगे:
प्रमोशन कोटे में वृद्धि: क्लर्क पद पर प्रमोशन का कोटा 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया गया है।
पात्रता की शर्त: अब मात्र 5 साल की सेवा पूरी करने वाले ग्रुप-D कर्मचारी पदोन्नति के पात्र होंगे।
एक्स-ग्रेशिया नियुक्तियां: बिल में 5 फीसदी एक्स-ग्रेशिया पदों को अनिवार्य बनाने का प्रावधान भी शामिल है।
निलंबित विधायकों की उपस्थिति और व्हिप का साया
सत्र की एक और बड़ी खबर राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस से निलंबित विधायकों की रही। पार्टी द्वारा जारी संदेश के बाद निलंबित 5 विधायकों में से तीन विधायक— शैली चौधरी, जरनैल सिंह और रेनू बाला— सदन की कार्यवाही में शामिल होने पहुंचे।
निलंबन के बावजूद इन विधायकों को तकनीकी रूप से पार्टी व्हिप का पालन करना अनिवार्य है। इनकी उपस्थिति ने सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है कि भविष्य में कांग्रेस के भीतर समीकरण क्या रुख अख्तियार करेंगे।









