Haryana News: हरियाणा की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें हरविंद्र कल्याण ने विधानसभा की गरिमा से जुड़े मुद्दों पर गंभीर रुख अपनाते हुए नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा से औपचारिक स्पष्टीकरण मांगा है। मामला विधानसभा परिसर के बाहर कथित रूप से आयोजित किए गए ‘समानांतर सत्र’ से जुड़ा हुआ है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
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समानांतर सत्र पर उठे सवाल
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा है कि कुछ विधायकों को विधानसभा परिसर के बाहर एकत्र कर जिस तरह की गतिविधि की गई, वह संसदीय परंपराओं और स्थापित नियमों के अनुरूप नहीं प्रतीत होती। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को गंभीर बताते हुए इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा से जुड़ा विषय माना है। इस संदर्भ में उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से पूछा है कि किस नियम या संसदीय परंपरा के आधार पर इस तरह की गतिविधि आयोजित की गई।
स्पीकर ने मांगा औपचारिक जवाब
स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पत्र लिखकर कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देने को कहा है। इसमें यह भी शामिल है कि 27 अप्रैल को हुए हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र को किस आधार पर असंवैधानिक बताया गया। इसके अलावा, सदन में प्रस्तुत किए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से जुड़े सरकारी प्रस्ताव को असंवैधानिक कहने के पीछे क्या ठोस कारण थे, इस पर भी विस्तृत जवाब मांगा गया है।
सरकारी मुख्य सचिव से भी रिपोर्ट तलब
इस मामले को और गंभीर मानते हुए विधानसभा सचिवालय ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव से भी इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी और रिपोर्ट देने को कहा है। इससे संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी जांच के दायरे में आ गया है।
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विधानसभा की गरिमा पर जोर
विधानसभा अध्यक्ष ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही संविधान, नियमों और संसदीय परंपराओं के अनुसार ही संचालित होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की समानांतर या भ्रमित करने वाली गतिविधि न केवल व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को भी प्रभावित कर सकती है।
राजनीतिक मर्यादा बनाए रखने की अपील
स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा जताई है कि वे जल्द और स्पष्ट रूप से अपना जवाब प्रस्तुत करें, ताकि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके। उनका कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संसदीय मर्यादाओं का पालन आवश्यक है।









