US Political News: डेढ़ साल बाद हरमीत ढिल्लों ने छोड़ा पद, चुनावी नतीजों के बाद अमेरिका में क्या बदला?

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका लगा है। न्याय विभाग की वरिष्ठ अधिकारी हरमीत ढिल्लों ने इस्तीफा दे दिया है। आखिर डेढ़ साल तक महत्वपूर्ण पद संभालने वाली ढिल्लों ने अचानक कुर्सी क्यों छोड़ी? क्या चुनावी नतीजों के बाद प्रशासन में बड़े बदलाव शुरू हो गए हैं?

डेढ़ साल बाद हरमीत ढिल्लों ने छोड़ा पद

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

नवम्बर 6, 2026

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US Political News: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग की प्रमुख हरमीत ढिल्लों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप प्रशासन छोड़ने वाली वह पहली वरिष्ठ अधिकारी बताई जा रही हैं। उनके इस्तीफे के बाद अमेरिकी राजनीति और न्याय विभाग के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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अटॉर्नी जनरल ने की हरमीत ढिल्लों की तारीफ

अमेरिका के अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर ढिल्लों के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि हरमीत ढिल्लों ने दृढ़ विश्वास के साथ नागरिक अधिकार प्रभाग का नेतृत्व किया। उन्होंने हर अमेरिकी की नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करने और बिना किसी डर या पक्षपात के कानून लागू करने का प्रयास किया। दूसरी ओर, ढिल्लों ने भी अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए इस पद पर काम करने को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया।

ट्रंप का आभार जताकर आगे की संभावनाओं पर दिया संकेत

हरमीत ढिल्लों ने अपने बयान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताया। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में अवैध डीईआई यानी विविधता, समानता और समावेशन से जुड़ी नीतियों को समाप्त करने की दिशा में काम किया गया। इसके अलावा महिलाओं और लड़कियों के खेलों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि अब वह अपने जीवन में आगे आने वाले अवसरों को लेकर उत्साहित हैं।

डेढ़ साल तक संभाली नागरिक अधिकार प्रभाग की जिम्मेदारी

डेढ़ साल तक संभाली नागरिक अधिकार प्रभाग की जिम्मेदारी
डेढ़ साल तक संभाली नागरिक अधिकार प्रभाग की जिम्मेदारी

हरमीत ढिल्लों करीब डेढ़ साल तक सहायक अटॉर्नी जनरल के पद पर रहीं। इससे पहले वह ट्रंप के चुनाव प्रचार अभियान में कानूनी सलाहकार की भूमिका निभा चुकी थीं। उनके नेतृत्व में नागरिक अधिकार प्रभाग की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पारंपरिक रूप से यह विभाग मतदान तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने और पुलिस सुधार से जुड़े कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार रहा है। हालांकि, ढिल्लों ने ट्रंप प्रशासन की विचारधारा के अनुरूप इसकी कार्यशैली और प्राथमिकताओं को बदलने की कोशिश की।

कर्मचारियों की कमी और विवादों में रहा विभाग

ढिल्लों के कार्यकाल के दौरान नागरिक अधिकार प्रभाग में कर्मचारियों की भारी कमी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग के 75 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी या उन्हें हटा दिया गया। उनकी जगह रूढ़िवादी विचारधारा वाले कई वकीलों को नियुक्त किया गया, लेकिन पुराने कर्मचारियों की कमी पूरी करना चुनौती बना रहा। ढिल्लों ने दक्षिणपंथी मुद्दों का भी समर्थन किया और अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन के तहत हथियार रखने के अधिकार से संबंधित एक अलग प्रभाग शुरू किया।

चुनावी मामलों से धीरे-धीरे कम हुई भूमिका

इस्तीफे से पहले के कुछ हफ्तों में ढिल्लों न्याय विभाग के महत्वपूर्ण चुनावी मामलों से दूर होती दिखाई दीं। विभाग ने कई ऐसे मुकदमे शुरू किए थे, जिनका संबंध ट्रंप के चुनाव में धांधली के आरोपों से था। इन मामलों में राष्ट्रपति की विशेष दिलचस्पी थी, लेकिन धीरे-धीरे ढिल्लों की भूमिका सीमित होती चली गई।

मतदाता सूची के मुकदमों में अदालत से लगा झटका

ढिल्लों को सबसे बड़ी कानूनी चुनौती मतदाता सूचियों से जुड़े मामलों में मिली। उन्होंने कई राज्यों में मुकदमे दायर कर मतदाता सूचियों तक पहुंच मांगी थी। उनका तर्क था कि इससे गैर-अमेरिकी नागरिकों के नाम हटाने और मतदाता सूची को दुरुस्त करने में मदद मिलेगी। हालांकि, विभिन्न अदालतों ने इन मुकदमों को खारिज कर दिया। न्यायाधीशों ने चिंता जताई कि ऐसे प्रयासों से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और उनकी निजी जानकारी का दुरुपयोग होने का खतरा है।

विश्वविद्यालयों के खिलाफ भी उठाए थे कदम

ढिल्लों के नेतृत्व में न्याय विभाग ने कुछ विश्वविद्यालयों के खिलाफ भी कार्रवाई की कोशिश की। इन संस्थानों पर यहूदी विरोध और श्वेत छात्रों के साथ भेदभाव के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन मामलों में भी विभाग को सीमित सफलता मिली। कुछ विश्वविद्यालयों ने यहूदी विरोध को रोकने के लिए कदम उठाने पर सहमति जताई, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, न्याय विभाग की ओर से इन प्रयासों की निगरानी के लिए कोई स्पष्ट कार्ययोजना सामने नहीं आई। अब ढिल्लों के इस्तीफे के बाद ट्रंप प्रशासन में आगे क्या बदलाव होंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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