Haridwar: हर-की-पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश निषेध के बोर्ड, सरकार कर रही समीक्षा

गंगा सभा ने कहा है कि घाटों की धार्मिक शुचिता और गरिमा बनाए रखने के लिए प्रवेश प्रतिबंध जरूरी है। साथ ही उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि हर-की-पौड़ी पर ड्यूटी के लिए गैर-हिंदू पुलिस कर्मियों या अधिकारियों की तैनाती न की जाए।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जनवरी 18, 2026

Haridwar: उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित पवित्र स्थल हर-की-पौड़ी पर शुक्रवार को कई स्थानों पर ऐसे बोर्ड और पोस्टर लगाए गए जिनमें लिखा है – “गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है”। यह कदम गंगा सभा द्वारा उठाया गया है, जो ब्रह्मकुंड और आसपास के घाटों का प्रबंधन करती है। इस निर्णय ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में गहरी बहस छेड़ दी है। राज्य सरकार पहले से ही इस क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर विचार कर रही थी, ऐसे में यह विवाद और अधिक गंभीर हो गया है।

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गंगा सभा का तर्क

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गैर-हिंदुओं के प्रवेश निषेध के बोर्ड

गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम और सचिव उज्ज्वल पंडित ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह निर्णय घाटों की धार्मिक शुचिता और गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उन्होंने 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय के मार्गदर्शन में बने हरिद्वार नगर पालिका के उपनियमों का हवाला दिया। इन प्रावधानों में हर-की-पौड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश, निवास और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक का उल्लेख है। गंगा सभा ने सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि इस क्षेत्र में ड्यूटी के लिए गैर-हिंदू पुलिस कर्मियों या अधिकारियों की तैनाती न की जाए।

राज्य सरकार का रुख

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मुद्दे की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए कहा कि हरिद्वार की ऐतिहासिक और धार्मिक गरिमा को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा कानूनों और नियमों की गहन समीक्षा की जा रही है और इसके लिए संतों व अन्य हितधारकों से लगातार चर्चा हो रही है।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

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गैर-हिंदुओं के प्रवेश निषेध के बोर्ड

इस कदम पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं।

बीजेपी: उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इसे दशकों पुरानी परंपरा और सनातन भावनाओं का सम्मान बताते हुए समर्थन किया।

विपक्ष: विपक्षी दलों ने इसे संविधान का उल्लंघन बताया। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने इसे बहु-धार्मिक समाज में अव्यावहारिक करार दिया। वहीं समाजवादी पार्टी के नेता एस.टी. हसन ने इसे असंवैधानिक और समाज में नफरत फैलाने वाला कदम बताया। उनका कहना है कि संविधान हर भारतीय को देश के किसी भी हिस्से में जाने की स्वतंत्रता देता है।

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