Har Ki Pauri : उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार में इन दिनों एक बार फिर धार्मिक पहचान और मर्यादा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विश्व प्रसिद्ध ‘हर की पौड़ी’ क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग ने अब जोर पकड़ लिया है। संतों और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों द्वारा उठाई गई इस मांग ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। इस मुद्दे पर अब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है, जिससे देवभूमि का सियासी पारा गरमाया हुआ है।
“पवित्रता सर्वोपरि है”: उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बड़ा बयान
हर की पौड़ी में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग का समर्थन करते हुए उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अपना स्पष्ट पक्ष रखा है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि कुछ स्थल अपनी विशिष्ट धार्मिक पवित्रता और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। भट्ट ने तर्क दिया कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि परंपरा और मर्यादाओं के अनुरूप पहले से ही स्थापित मान्यताओं का हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्थलों की शुचिता बनाए रखना सभी का दायित्व है।
कांग्रेस पर तुष्टिकरण का आरोप: भाजपा ने धार्मिक स्थलों की तुलना मक्का-मदीना से की
महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल इस मुद्दे को बेवजह तूल देकर तुष्टिकरण की राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि किसी दूसरे धर्म का व्यक्ति गंगा स्नान की इच्छा रखता होगा। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है, उसी तरह हिंदू धर्म के अति-पवित्र स्थलों की अपनी नियमावली होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर गंगा सभा या धर्माचार्य ऐसी मांग कर रहे हैं, तो उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
“घर वापसी का स्वागत”: सनातन धर्म अपनाने पर भाजपा का उदार रुख
अपने बयान के अंत में महेंद्र भट्ट ने एक दिलचस्प पहलू भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति गंगा स्नान के बाद यह घोषणा करता है कि वह सनातन धर्म की विचारधारा से प्रभावित है और इसमें शामिल होना चाहता है, तो उसका विरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे व्यक्तिगत आस्था और ‘घर वापसी’ के दृष्टिकोण से देखते हुए कहा कि सनातन धर्म सभी का स्वागत करता है, बशर्ते वह इसकी मर्यादाओं का पालन करने के लिए तैयार हो।
विवाद की जड़: शेख की वेशभूषा में युवकों के वीडियो ने मचाया हड़कंप
इस पूरे विवाद की शुरुआत हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से हुई थी। वीडियो में दो युवक ‘शेख’ की पारंपरिक वेशभूषा में हर की पौड़ी के प्रतिबंधित क्षेत्र में घूमते नजर आए थे। इस घटना के सामने आते ही तीर्थ पुरोहितों की संस्था ‘श्री गंगा सभा’ और स्थानीय संतों ने कड़ा ऐतराज जताया। संतों का तर्क है कि हर की पौड़ी एक मंदिर के समान पवित्र स्थल है, कोई पर्यटन स्थल नहीं। इसके बाद से ही सुरक्षा कड़ी करने और गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग ने आंदोलन का रूप ले लिया है।
भविष्य की चुनौती: प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं के बीच समन्वय
वर्तमान में हरिद्वार जिला प्रशासन और पुलिस विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जहाँ एक ओर गंगा सभा और संत समाज इस नियम को कड़ाई से लागू करने पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर इसे कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार के चश्मे से भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उत्तराखंड सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या औपचारिक कदम उठाती है, ताकि देवभूमि की शांति और धार्मिक परंपराएं दोनों सुरक्षित रह सकें।
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