Hamirpur Bridge Collapse: आंधी-तूफान के बीच ढहा निर्माणाधीन पुल, 5 मजदूरों की दर्दनाक मौत

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर बन रहा एक निर्माणाधीन पुल भीषण आंधी-तूफान और बारिश के कारण अचानक ढह गया।

Hamirpur Bridge Collapse

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 29, 2026

Hamirpur Bridge Collapse: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और बड़ी दुर्घटना की खबर सामने आई है। यहाँ भीषण आंधी-तूफान और तेज बारिश के कारण एक निर्माणाधीन पुल का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। इस हादसे में मलबे के नीचे दबने से अब तक पांच मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य मजदूरों के अभी भी मलबे में दबे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है।

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आधी रात को हुआ हादसा

यह दुखद घटना गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात करीब 3:00 बजे की है। बेतवा नदी पर इस पुल का निर्माण कार्य चल रहा था, जो थाना लालपुर के मोराकंदर और कुरारा के मवाईजार को आपस में जोड़ने के लिए बनाया जा रहा था। रोजाना की तरह काम खत्म करने के बाद कई मजदूर रात को इसी पुल के नीचे सो रहे थे, ताकि सुबह उठकर वे दोबारा अपने काम पर लग सकें। इसी बीच देर रात आए भीषण आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश के चलते निर्माणाधीन पुल का एक भारी-भरकम हिस्सा सीधे सोते हुए मजदूरों पर आ गिरा।

राहत और बचाव कार्य जारी

हादसे की सूचना मिलते ही चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग और कई थानों की पुलिस बल मौके पर पहुंचे। मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव अभियान) चलाया जा रहा है। हालांकि, मलबे की विशालता और स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि हताहतों की संख्या बढ़ सकती है और मौतों का यह आंकड़ा 10 तक भी पहुंच सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल और पुल की पृष्ठभूमि

इस भीषण हादसे के बाद निर्माण कार्य में बरती जा रही लापरवाही को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का आरोप है कि कार्यस्थल पर मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता और पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे।

यह पुल राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद के विशेष प्रयासों और मंजूरी के बाद बनाया जा रहा था। खास बात यह है कि इस पुल का निर्माण सांसद के पैतृक गांव मोरकंदर परसानी के बेहद नजदीक ही किया जा रहा था, जिससे स्थानीय लोगों को काफी उम्मीदें थीं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों की जान बचाने पर केंद्रित है।

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