GST on Petrol-Diesel: देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच अब इन्हें जीएसटी के दायरे में लाने की मांग फिर तेज हो गई है। Chamber of Trade and Industry (CTI) ने केंद्र सरकार से अपील की है कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले अलग-अलग टैक्स खत्म कर इन्हें वस्तु एवं सेवा कर यानी GST के तहत शामिल किया जाए।
इस मुद्दे को लेकर CTI के चेयरमैन Brijesh Goyal ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर मांग रखी है। उनका कहना है कि लंबे समय से व्यापारी, उद्योगपति और आम लोग ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं और अब सरकार को इस दिशा में बड़ा कदम उठाना चाहिए।
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पेट्रोल-डीजल पर लग रहे हैं कई तरह के टैक्स
CTI के अनुसार मौजूदा समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा हिस्सा टैक्स का होता है। दिल्ली के उदाहरण को समझाते हुए संगठन ने बताया कि 22 मई तक पेट्रोल की मूल कीमत करीब 66.29 रुपये प्रति लीटर थी। इसके ऊपर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्य सरकार का वैट और डीलर मार्जिन जोड़ा जाता है, जिसके बाद उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
इसी तरह डीजल पर भी कई प्रकार के टैक्स लगाए जाते हैं। संगठन का दावा है कि पेट्रोल पर कुल टैक्स करीब 42 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, जबकि डीजल पर लगभग 32 प्रतिशत टैक्स वसूला जाता है। यही वजह है कि आम लोगों और व्यापारियों पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
अलग-अलग राज्यों में अलग हैं ईंधन के दाम
CTI ने यह भी कहा कि देश के हर राज्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग-अलग हैं क्योंकि सभी राज्य अपने हिसाब से वैट तय करते हैं। उदाहरण के तौर पर Telangana में पेट्रोल पर सबसे अधिक करीब 35.2 प्रतिशत वैट लगाया जाता है, जिसके कारण वहां पेट्रोल सबसे महंगा है।
वहीं Andaman and Nicobar Islands में पेट्रोल और डीजल पर केवल 1 प्रतिशत वैट लगाया जाता है, इसलिए वहां ईंधन की कीमतें सबसे कम हैं। संगठन का कहना है कि अलग-अलग टैक्स दरों के कारण देशभर में ईंधन की कीमतों में भारी अंतर दिखाई देता है।
वन नेशन वन टैक्स की अवधारणा पर सवाल
बृजेश गोयल ने अपने पत्र में याद दिलाया कि जब साल 2017 में GST लागू किया गया था, तब “वन नेशन, वन टैक्स” का नारा दिया गया था। इसका उद्देश्य पूरे देश में टैक्स व्यवस्था को एक समान बनाना था।
लेकिन पेट्रोल और डीजल अब भी GST से बाहर हैं, जिसकी वजह से राज्य सरकारें अलग-अलग दरों पर वैट वसूल रही हैं। CTI का कहना है कि इससे एक समान टैक्स व्यवस्था की मूल भावना कमजोर पड़ रही है।
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GST में शामिल होने से क्या होगा फायदा?
संगठन के अनुसार अगर पेट्रोल और डीजल को GST के तहत लाया जाता है तो देशभर में ईंधन की कीमतें लगभग एक समान हो सकती हैं। साथ ही टैक्स का बोझ कम होने से पेट्रोल और डीजल के दामों में भी गिरावट आने की संभावना है। व्यापारियों का मानना है कि इससे ट्रांसपोर्ट खर्च कम होगा और महंगाई पर भी कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। इसके अलावा आम उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी और कारोबार की लागत घटने से उद्योगों को फायदा होगा। अब सभी की नजर केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी है कि पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।










