GST Council Meeting 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 57वीं महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य देश की वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को और अधिक सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनाना है। वर्तमान में सरकार का पूरा जोर कर प्रणाली को पूरी तरह से ‘भरोसे पर आधारित’ बनाने और कारोबारियों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी व्यापार को सुगम बनाने पर है। इस बैठक में टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने वाले कई अहम फैसलों और प्रस्तावों पर गहन मंथन किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में देश के छोटे-बड़े कारोबारियों और आम जनता को भारी लाभ मिलने की उम्मीद है।
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जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति और आपराधिक मामलों की सीमा पर मंथन

बैठक के सबसे बड़े एजेंडों में जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति को समाप्त करने का प्रस्ताव शामिल है। मौजूदा नियमों के तहत, एक करोड़ रुपये से अधिक के कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) या गलत रिफंड के मामलों में कमिश्नर स्तर के अधिकारी की मंजूरी से गिरफ्तारी की जा सकती है। अब इस व्यवस्था में बड़े बदलाव पर विचार हो रहा है, जिसके तहत कर वसूली पर अधिक जोर दिया जाएगा और सख्त कानूनी कार्रवाई को अन्य एजेंसियों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
इसके साथ ही, कर चोरी या हेरफेर के मामलों में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की वित्तीय सीमा को मौजूदा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार जीएसटी कानून के नौ अपराधों को गैर-आपराधिक श्रेणी में डालने और 24 प्रावधानों को कड़े से नरम करने की तैयारी में है। रिटर्न दाखिल करने में देरी, वर्गीकरण विवाद या नकदी संकट के कारण हुए विलंब जैसे मामलों में केवल बकाया टैक्स, ब्याज और जुर्माना भरकर गिरफ्तारी से पूरी तरह बचने का प्रावधान लाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।
छोटे टैक्स विवादों में राहत और बिलों के मिलान की नई व्यवस्था
करदाताओं को छोटी-मोटी अड़चनों से बचाने के लिए परिषद 10,000 रुपये से कम की टैक्स मांग वाले मामलों में नोटिस जारी न करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, ऐसे मामले कुल मामलों का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन इनमें राजस्व की प्राप्ति बहुत कम होती है। व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए औपचारिक नोटिस भेजने से पहले करदाता को प्राथमिक जानकारी देने और उसका पक्ष सुनने का मौका देने का नियम बन सकता है। इसके अलावा, खरीदार और सप्लायर के बिलों के स्वचालित मिलान की व्यवस्था पर भी चर्चा हो रही है, जिससे फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और बिलों की mismatching जैसी समस्याओं पर अंकुश लगाया जा सके।
छोटे कारोबारियों, ई-कॉमर्स विक्रेताओं और परिवहन नियमों में बड़े बदलाव

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए व्यापार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को बेहद आसान बनाने का प्रस्ताव है। इसके तहत, यदि किसी विक्रेता का दूसरे राज्यों में भौतिक कार्यालय नहीं है, तो वे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस को ही अपना आधिकारिक व्यावसायिक स्थान घोषित कर सकेंगे। विक्रेताओं को केवल अपने गृह राज्य में भौतिक सत्यापन और प्रमाणीकरण कराना होगा, और अन्य राज्यों में प्लेटफॉर्म की सहमति से आसानी से पंजीकरण मिल सकेगा। इस कदम से देश के करीब 9.5 लाख छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) को बढ़ावा देने के लिए वाहनों की जांच के नियमों में बदलाव किया जा रहा है। अब वाहनों को केवल विशिष्ट अनुमति के आधार पर ही रोका जाएगा, जिससे अलग-अलग राज्यों की सीमाओं पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी और ढुलाई लागत घटेगी। इसके अतिरिक्त, सोने-चांदी के आयात पर आईजीएसटी छूट वापस लेने, कर्मचारियों के स्वास्थ्य व जीवन बीमा प्रीमियम पर आईटीसी देने तथा टैक्स दरों में बदलाव साल में केवल एक बार करने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी मुहर लग सकती है। ये सभी बदलाव अगले साल की शुरुआत से चरणबद्ध रूप से लागू किए जाने की संभावना है।
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