रिकवरी अच्छी, उत्पादन कम; बिहार की चीनी मिलों के सामने नई चुनौती

पटना  यद्यपि उत्पादन में इस मामूली गिरावट से निराश होने का कोई तुक नहीं, लेकिन बिहार में मीठी चीनी की यह कड़वी सच्चाई है। राष्ट्रीय औसत से अधिक रिकवरी रेट (10.3%) के बावजूद इस बार (पेराई सत्र 2025-26) चीनी का उत्पादन अपेक्षाकृत कम हुआ है। कार्यशील सभी 10 मिलों ने मिलकर मात्र 586549.011 टन चीनी का उत्पादन किया, जो पूरे देश में उत्पादित चीनी की मात्रा का लगभग 2.5 प्रतिशत है। रिकवरी रेट का मतलब है कि एक क्विंटल गन्ने से उतना किलोग्राम चीनी तैयार हुई। गन्ना उद्योग पर फोकस किए हुए बिहार के लिए उत्पादन का वर्तमान आंकड़ा किसी

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Published On :

अगस्त 1, 2026

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पटना
 यद्यपि उत्पादन में इस मामूली गिरावट से निराश होने का कोई तुक नहीं, लेकिन बिहार में मीठी चीनी की यह कड़वी सच्चाई है। राष्ट्रीय औसत से अधिक रिकवरी रेट (10.3%) के बावजूद इस बार (पेराई सत्र 2025-26) चीनी का उत्पादन अपेक्षाकृत कम हुआ है।

कार्यशील सभी 10 मिलों ने मिलकर मात्र 586549.011 टन चीनी का उत्पादन किया, जो पूरे देश में उत्पादित चीनी की मात्रा का लगभग 2.5 प्रतिशत है। रिकवरी रेट का मतलब है कि एक क्विंटल गन्ने से उतना किलोग्राम चीनी तैयार हुई।

गन्ना उद्योग पर फोकस किए हुए बिहार के लिए उत्पादन का वर्तमान आंकड़ा किसी चुनौती से कम नहीं। चीनी बनाने के लिए इस बार राज्य में 5690140 टन गन्ने की पेराई हुई। सुखद यह कि किसानों से खरीदे गए गन्ना मूल्य का चीनी मिलों ने शत प्रतिशत (2137.83 करोड़ रुपये) भुगतान कर दिया है।

क्षमता के हिसाब से गन्ने की सर्वाधिक पेराई हरिनगर चीनी मिल ने की और सबसे कम रीगा ने। चार वर्ष के अंतराल के बाद रीगा चीनी मिल द्वारा पुन: उत्पादन शुरू हुआ है। इस संतोषजनक पहल से आगे की उपलब्धि के लिए अभी प्रयास नीति और नियम से आगे नहीं बढ़ पाया है।

उत्पादन में सातवां स्थान:
देश में चीनी का उत्पादन करने वाले राज्यों में बिहार अब तक सातवें स्थान पर रहा है। इस बार भी सर्वाधिक उत्पादन महाराष्ट्र ने किया। उत्तर प्रदेश और कर्नाटक क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। ये तीनों राज्य मिलकर देश के चीनी उत्पादन में लगभग 80 प्रतिशत का योगदान करते हैं।

कम उत्पादन के कारण:
बेहतर रिकवरी रेट के बावजूद चीनी के कम उत्पादन के मुख्य कारणों में पुरानी मशीनें, प्रति हेक्टेयर कम उपज, निम्न प्रभेद का गन्ना और सहवर्ती उत्पाद (एथनॉल, बिजली आदि) हैं। उत्पादन बढ़ाने के लिए मिलों में अत्याधुनिक संयंत्र लगाने के साथ उन्नत प्रभेद के गन्ने की बुआई अपेक्षित है।

बिहार में चीनी का उत्पादन (लाख टन में)
वर्ष     उत्पादन (लाख टन)
2022-23     6.27
2023-24     6.88
2024-25     6.08
2025-26     5.87

2025-26 में मिलों द्वारा चीनी का उत्पादन (टन में)
मिल का नाम       उत्पादन (टन)
हरिनगर               143583.70
नरकटियागंज      105163.81
बगहा                   89101.90
हसनपुर                50519.00
मझौलिया             48800.00
सिधवलिया          46965.00
गोपालगंज           34716.30
लौरिया              30039.30
सुगौली             22530.50
रीगा                15129.50

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