Gold Silver Price Today: सोने ने तोड़ा 7 हफ्तों का रिकॉर्ड, चांदी भी दौड़ी; निवेशकों के लिए बड़ा संकेत

कम बॉन्ड यील्ड और कमजोर डॉलर के फायदों के साथ-साथ कीमती और औद्योगिक धातु दोनों भूमिकाओं से समर्थन मिलने के कारण चांदी का बाजार भी मजबूत बना हुआ है।

Gold- Silver Price

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 6, 2026

Gold Silver price Today: वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चौथे कारोबारी सत्र में सोने की कीमतों में तेजी जारी रही, जिसके चलते सोना अपने सात हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही चांदी की कीमतों में भी जोरदार बढ़त दर्ज की गई है। कमजोर अमेरिकी डॉलर, घटती ट्रेजरी यील्ड और वैश्विक आर्थिक व भू-राजनीतिक कारकों ने बुलियन मार्केट (सोना-चांदी) की मांग को पंख लगा दिए हैं। निवेशकों का रुझान लगातार सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।

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कॉमैक्स (COMEX) और स्पॉट मार्केट का हाल

कमोडिटी एक्सचेंज कॉममैक्स (COMEX) पर सोने के वायदा भाव (फ्यूचर्स) में 1.3 प्रतिशत की उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई, जिसके बाद यह 4,361.30 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, चांदी के वायदा भाव भी 0.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62.695 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुए।

दूसरी ओर, स्पॉट मार्केट ( हाजिर बाजार) में सोना 4,285.84 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर जा पहुंचा। यह 18 जून के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। यह हालिया उछाल पिछले सत्र के दौरान बुलियन मार्केट में दर्ज की गई फरवरी के बाद की सबसे बड़ी एक-दिवसीय बढ़त के ठीक बाद आया है, जिससे निवेशकों में उत्साह का माहौल है।

सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आने के प्रमुख कारण

कीमती धातुओं के बाजार में आई इस बेमिसाल तेजी के पीछे कई बड़े वैश्विक मैक्रोइकोनॉमिक कारक जिम्मेदार हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:

कमजोर अमेरिकी डॉलर: प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आई है। डॉलर के कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर-मूल्य वाली कमोडिटीज (जैसे सोना और चांदी) अन्य विदेशी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सस्ती और अधिक किफायती हो जाती हैं, जिससे इनकी वैश्विक मांग तेजी से बढ़ती है।

बॉन्ड यील्ड में गिरावट: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट ने भी बुलियन को बड़ा समर्थन दिया है। बॉन्ड यील्ड घटने से सोने जैसी बिना ब्याज (यील्ड) देने वाली संपत्तियों को अपने पास रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) कम हो जाती है, जिससे निवेशक शेयरों से हटकर कीमती धातुओं में पैसा लगाना पसंद करते हैं।

पश्चिम एशिया के तनाव में नरमी की उम्मीदें: कूटनीतिक प्रयासों और रिपोर्ट्स से ऐसे संकेत मिले हैं कि पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है, जिसमें सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को पुनः खोलने पर बातचीत शामिल है। तनाव घटने की उम्मीदों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है, जिससे ऊर्जा-जनित महंगाई का डर कम हुआ है। इससे केंद्रीय बैंकों पर आक्रामक ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव घटा है, जो सोने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है।

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें: हाल ही में आए निजी पेरोल के कमजोर आंकड़ों और श्रम बाजार (Labor Market) में नरमी के संकेतों के बाद निवेशक अमेरिकी मौद्रिक नीति का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। बाजार की निगाहें अब शुक्रवार (7 अगस्त) को आने वाली महत्वपूर्ण अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि यह डेटा कमजोर रहता है, तो फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना और मजबूत होगी, जिससे सोने को और अधिक बल मिल सकता है।

चांदी की बाजार स्थिति और औद्योगिक मांग

सोने के साथ-साथ चांदी में भी मजबूत तेजी का रुख बना हुआ है। चांदी को भी लगभग वे तमाम मैक्रोइकॉनॉमिक कारक समर्थन दे रहे हैं, जिन्होंने सोने की कीमतों को ऊपर उठाया है। इसके अलावा, चांदी की खास बात यह है कि यह केवल एक कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख औद्योगिक धातु (Industrial Metal) भी है। ग्रीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी सेक्टर से लगातार बनी औद्योगिक मांग चांदी के लिए एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम का काम कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत रुख पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। इन वजहों से निकट भविष्य में सोने और चांदी के बाजारों में इसी तरह का उतार-चढ़ाव और तेजी का दौर बने रहने की पूरी संभावना है।

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