Sikkim Earthquake Today: सिक्किम में भूकंप के दो झटके, गंगटोक में दहशत, जानें भारत के वे 5 जोन जहाँ मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा

आज तड़के जब पूरा सिक्किम सो रहा था, तब दो लगातार भूकंप के झटकों ने सबको बिस्तरों से बाहर निकाल दिया। गंगटोक से महज 10 किमी दूर केंद्र होने के कारण कंपन काफी तेज था। क्या ये छोटे झटके किसी बड़ी तबाही की आहट हैं? जानें भारत के उन शहरों की लिस्ट जो 'रेड जोन' में हैं।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 20, 2026

Sikkim Earthquake Today: हिमालयी राज्य सिक्किम की राजधानी गंगटोक में शुक्रवार की सुबह दहशत भरी रही। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, तड़के शहर में भूकंप के दो क्रमिक झटके महसूस किए गए। पहला झटका सुबह 4:26 बजे आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 मापी गई। इसका केंद्र गंगटोक से लगभग 10.7 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में जमीन से महज 5 किलोमीटर की गहराई पर था। इसके कुछ ही समय बाद दूसरा झटका महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 2.7 दर्ज की गई। राहत की बात यह रही कि अधिकारियों ने अब तक जान-माल के किसी भी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की है, लेकिन तड़के आए इन झटकों ने स्थानीय निवासियों को चिंता में डाल दिया है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: आखिर क्यों कांपती है धरती?

भूकंप की घटनाओं के पीछे पृथ्वी की आंतरिक संरचना जिम्मेदार होती है। हमारी धरती के भीतर मुख्य रूप से 7 टेक्टोनिक प्लेट्स मौजूद हैं, जो निरंतर गतिमान रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं या इनमें घर्षण होता है, तो भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है, जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं। हिमालयी क्षेत्र, जिसमें सिक्किम भी शामिल है, विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि यहाँ भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। यही कारण है कि उत्तर-पूर्व भारत में भूकंप की आवृत्ति अधिक बनी रहती है।

भारत के भूकंपीय जोन: दिल्ली और उत्तर-पूर्व का बड़ा खतरा

भूगर्भ विशेषज्ञों ने जोखिम के आधार पर भारत को चार मुख्य जोन में विभाजित किया है। देश का लगभग 59% हिस्सा भूकंप के प्रति संवेदनशील है।

  • जोन-5: यह सबसे खतरनाक क्षेत्र है, जिसमें पूर्वोत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर और कच्छ का हिस्सा आता है।
  • जोन-4: दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के मैदानी इलाके इसमें शामिल हैं। यहाँ 7 से अधिक तीव्रता का भूकंप भारी तबाही मचा सकता है।
  • जोन-3 और जोन-2: ये इलाके अपेक्षाकृत कम संवेदनशील माने जाते हैं, लेकिन यहाँ भी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।

रिक्टर स्केल की माप: तीव्रता और होने वाली तबाही का गणित

भूकंप की विनाशकारी शक्ति को रिक्टर स्केल के जरिए समझा जा सकता है। तीव्रता का हर एक अंक पिछले अंक से 10 गुना अधिक कंपन पैदा करता है।

  • 0 – 3.9: ये हल्के झटके होते हैं, जिनसे अक्सर नुकसान नहीं होता।
  • 0 – 5.9: घर का सामान गिरने लगता है और फर्नीचर हिल सकता है।
  • 0 – 6.9: पुरानी और कमजोर इमारतों में दरारें आ सकती हैं।
  • 0 से अधिक: यह श्रेणी भीषण तबाही की होती है, जिसमें ऊंची इमारतें गिर सकती हैं और समुद्र में सुनामी का खतरा पैदा हो जाता है।

भूकंप के समय सुरक्षा और बचाव के उपाय

चूंकि भूकंप की सटीक भविष्यवाणी अभी संभव नहीं है, इसलिए सुरक्षा ही एकमात्र विकल्प है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी झटके महसूस हों, तुरंत ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड’ की तकनीक अपनाएं। किसी मजबूत मेज के नीचे छिप जाएं या खुले मैदान की ओर भागें। लिफ्ट का उपयोग करने से बचें और बिजली के खंभों व ऊंची इमारतों से दूर रहें। सिक्किम जैसे पहाड़ी राज्यों में निर्माण कार्य के दौरान भूकंपरोधी तकनीकों का इस्तेमाल करना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

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