Ganesh Chaturthi 2026: कब होगी गणपति स्थापना? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विसर्जन की तारीख

गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन घरों और पंडालों में विधि-विधान से भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

Ganesh Chaturthi 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 11, 2026

Ganesh Chaturthi 2026: विघ्नहर्ता भगवान गणेश के स्वागत के लिए देशभर में तैयारियां जोरों पर शुरू हो चुकी हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी की तिथि को लेकर लोगों में थोड़ा संशय बना हुआ था, लेकिन पंचांग की गणना के अनुसार इस बार यह महापर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा।

इसी शुभ दिन पर घरों और सार्वजनिक पंडालों में श्रद्धा के साथ गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह से आरंभ होकर अगले दिन 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी। इस दस दिवसीय भव्य गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा, जिस दिन भक्त नम आंखों से बप्पा का विसर्जन करेंगे।

स्थापना का शुभ मुहूर्त और समयावधि

Ganesh Chaturthi 2026
कब होगी गणपति स्थापना?

गणेश चतुर्थी के दिन भक्त अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिनों के लिए गणपति बप्पा को अपने घर विराजमान करते हैं। राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में मूर्ति स्थापना और पूजा के लिए सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक का समय सबसे उत्तम और शुभ माना गया है। हालांकि, देश के अलग-अलग शहरों और राज्यों में स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के आधार पर पूजा के इस मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग का अवलोकन अवश्य कर लेना चाहिए।

विधि-विधान से पूजा और भोग के नियम

गणेश जी की आराधना में नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक माना गया है:

पूजा स्थल की तैयारी: सबसे पहले पूजा घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करके एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।

प्रतिमा स्नान: इसके बाद विधि-विधान से गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित कर उन्हें जल और पंचामृत से स्नान कराएं।

प्रिय वस्तुएं अर्पित करें: बप्पा को वस्त्र, कलावा, अक्षत, सिंदूर, लाल फूल और उनकी सबसे प्रिय ‘दूर्वा घास’ अवश्य अर्पित करें।

भोग और आरती: गणेश जी को मोदक और लड्डू का विशेष भोग लगाएं। इसके पश्चात घी का दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें और अंत में सभी में प्रसाद वितरित करें।

पूजा के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

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कब होगी गणपति स्थापना?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश पूजा में कुछ चीजों का निषेध बताया गया है। भगवान गणेश को कभी भी तुलसी के पत्ते (तुलसी दल) नहीं चढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा, केतकी के फूल को भी गणेश पूजा में वर्जित माना गया है। पूजा के दौरान हमेशा साफ, साबुत और बिना टूटे हुए चावलों का ही उपयोग करना चाहिए।

धार्मिक महत्व और आध्यात्मिक उल्लास

सनातन संस्कृति में गणेश जी को ‘प्रथम पूज्य’ और सभी बाधाओं को हरने वाला ‘विघ्नहर्ता’ कहा गया है। किसी भी नए कार्य, मांगलिक अनुष्ठान या पूजा की शुरुआत सबसे पहले गणेश स्मरण के साथ ही होती है। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के इन दस दिनों में सच्चे मन से बप्पा की सेवा करने से घर में सुख, शांति, बुद्धि, विवेक और ऐश्वर्य का वास होता है। अनंत चतुर्दशी के दिन जब भक्त “गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के साथ प्रतिमा का विसर्जन करते हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

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