गदर 25 साल पूरे: डायरेक्टर अनिल शर्मा बोले- ये भगवान का आशीर्वाद है

सनी देओल, अमीषा पटेल, अमरीश पुरी, विवेक शौक, लिलेट दुबे और उत्कर्ष शर्मा स्टारर गदर एक प्रेम कथा को रिलीज हुए 25 साल पूरे हो गए हैं. मूवी ब्लॉकबस्टर हिट साबित हुई थी. दर्शकों को सकीना और तारा सिंह की कहानी काफी पसंद आई थी. अब डायरेक्टर ने इस बड़ी सफलता पर बात की. गदर के 25 साल पूरे होने पर क्या बोले अनिल शर्मा अनिल शर्मा ने ‘जूम’ संग इंटरव्यू में बताया, “गदर जैसी फिल्म किसी भी फिल्ममेकर की जिंदगी में एक बार ही आती है. यह भगवान का आशीर्वाद है. मैं दर्शकों का शुक्रिया अदा करता हूं कि

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Published On :

जून 15, 2026

सनी देओल, अमीषा पटेल, अमरीश पुरी, विवेक शौक, लिलेट दुबे और उत्कर्ष शर्मा स्टारर गदर एक प्रेम कथा को रिलीज हुए 25 साल पूरे हो गए हैं. मूवी ब्लॉकबस्टर हिट साबित हुई थी. दर्शकों को सकीना और तारा सिंह की कहानी काफी पसंद आई थी. अब डायरेक्टर ने इस बड़ी सफलता पर बात की.

गदर के 25 साल पूरे होने पर क्या बोले अनिल शर्मा
अनिल शर्मा ने ‘जूम’ संग इंटरव्यू में बताया, “गदर जैसी फिल्म किसी भी फिल्ममेकर की जिंदगी में एक बार ही आती है. यह भगवान का आशीर्वाद है. मैं दर्शकों का शुक्रिया अदा करता हूं कि यह मूवी लगातार ऐसे मुकाम हासिल कर रही है. 25 साल पूरे करना अपने आप में एक जश्न है.”

अनिल शर्मा ने भगवान का किया शुक्रिया
गदर को लेकर बात करते हुए अनिल शर्मा ने कहा, “भगवान की कृपा से, हम ‘गदर’ को एक बेहतरीन फिल्म बना पाए. ‘गदर’ एक ऐसी मूवी है, जो हमेशा पसंद की जाएगी और लोगों के दिलों में बसी रहेगी. ‘गदर’ आज के 25 साल के युवा के लिए भी उतनी ही एंटरटेनिंग है, जितनी उस समय के लोगों के लिए थी.”

गदर को ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर बताते हुए क्या बोले अनिल शर्मा
‘गदर’ को “इस सदी की पहली ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर” बताते हुए, डायरेक्टर ने आगे कहा कि अगर आप वैसी ही कोई दूसरी फिल्म बनाने के बारे में सोचें भी, तो भी उसे दोहराया नहीं जा सकता. कभी-कभी आपको वैसी कहानी मिल जाती है, लेकिन गलती होने के चांस भी रहते हैं.

अनिल शर्मा ने गदर को बताया, परफेक्ट मसाला एंटरटेनर
लोग आज भी इसे देख रहे हैं. अगर उन्हें इसमें कुछ भी गलत या बेमतलब का लगता, तो वे ट्रोल जरूर करते, लेकिन ‘गदर’ एकदम परफेक्ट मसाला बनी थी. हमने इस पर काफी रिसर्च की थी. आज चैटजीपीटी के जमाने में यह सब बहुत आसान हो गया है. हम दिल्ली और मुंबई की सेंट्रल लाइब्रेरी में पूरा-पूरा दिन बिताकर रिसर्च करते थे. इसी तरह हमने बंटवारे से जुड़ी असली घटनाओं और कहानियों को इकट्ठा किया था.”