Friendship Day: दोस्ती के जश्न की शुरुआत कहां से हुई? जानिए इतिहास

हर साल मनाया जाने वाला फ्रेंडशिप डे आखिर शुरू कहां से हुआ? क्या आप जानते हैं कि दोस्ती के इस खास दिन की कहानी करीब 100 साल पुरानी है। अमेरिका से शुरू हुआ यह सफर पैराग्वे होते हुए पूरी दुनिया तक कैसे पहुंचा और भारत में कब लोकप्रिय हुआ? जानिए पूरा इतिहास।

दोस्ती के जश्न की शुरुआत कहां से हुई?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 2, 2026

Friendship Day: दोस्ती हमारी जिंदगी का एक ऐसा रिश्ता है, जो खुशियों को बढ़ाता है और मुश्किल समय में सहारा देता है। दोस्तों के साथ बिताए पल हमेशा खास होते हैं। इसी खूबसूरत रिश्ते को सम्मान देने के लिए हर साल फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने दोस्तों को फ्रेंडशिप बैंड बांधते हैं, उपहार देते हैं और पुरानी यादों को ताजा करते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दोस्ती के नाम पर एक खास दिन मनाने की शुरुआत आखिर कैसे हुई? फ्रेंडशिप डे का इतिहास काफी रोचक है। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई, जिसके बाद यह परंपरा पैराग्वे पहुंची और धीरे-धीरे दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय हो गई।

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दोस्तों के लिए खास दिन का विचार कैसे आया?

फ्रेंडशिप डे की कहानी लगभग एक सदी पुरानी मानी जाती है। सबसे पहले अमेरिका में यह विचार सामने आया कि दोस्तों के लिए भी एक ऐसा दिन होना चाहिए, जब लोग अपने खास दोस्तों को अपनी भावनाएं बता सकें।

इस पहल को आगे बढ़ाने का श्रेय हॉलमार्क कंपनी के संस्थापक जॉयस हॉल को दिया जाता है। उनका उद्देश्य था कि लोग इस दिन अपने दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड भेजें और उन्हें यह महसूस कराएं कि वे उनकी जिंदगी में कितने महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि शुरुआत में इस विचार को लोगों ने ज्यादा स्वीकार नहीं किया। कुछ लोगों का मानना था कि यह केवल ग्रीटिंग कार्ड की बिक्री बढ़ाने का एक तरीका है। इसी कारण शुरुआती समय में फ्रेंडशिप डे को ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिल पाई।

पैराग्वे ने दी फ्रेंडशिप डे को नई पहचान

अमेरिका से शुरू हुआ यह विचार कुछ वर्षों बाद पैराग्वे पहुंचा, जहां इसे एक नई पहचान मिली। साल 1958 में पैराग्वे में लोगों ने दोस्ती के सम्मान में एक विशेष दिन मनाने की शुरुआत की। वहां लोगों का मानना था कि दोस्ती सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच का रिश्ता नहीं है, बल्कि यह अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और समुदायों के लोगों को जोड़ने का माध्यम भी बन सकती है। धीरे-धीरे फ्रेंडशिप डे मनाने की परंपरा दूसरे देशों में भी फैलने लगी और यह दिन दोस्ती के जश्न के रूप में पहचाना जाने लगा।

संयुक्त राष्ट्र ने दी अंतरराष्ट्रीय पहचान

दोस्ती और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने साल 2011 में 30 जुलाई को इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे के रूप में मान्यता दी। इसका उद्देश्य दुनिया के लोगों के बीच शांति, एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना था। हालांकि सभी देश इस दिन को 30 जुलाई को नहीं मनाते। कई देशों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं के अनुसार फ्रेंडशिप डे की अलग-अलग तारीख तय की है।

भारत में अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है फ्रेंडशिप डे

भारत में फ्रेंडशिप डे अगस्त महीने के पहले रविवार को मनाया जाता है। रविवार होने के कारण लोग अपने दोस्तों के साथ समय बिताने और खास पल साझा करने का मौका आसानी से पा लेते हैं। भारत में 1990 के दशक में फ्रेंडशिप बैंड और ग्रीटिंग कार्ड का चलन तेजी से बढ़ा। खासतौर पर स्कूल और कॉलेज के छात्रों के बीच यह दिन काफी लोकप्रिय हो गया। उस दौर में दोस्त एक-दूसरे को रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड बांधकर अपनी दोस्ती का इजहार करते थे। आज डिजिटल दौर में दोस्ती का जश्न मनाने का तरीका बदल गया है। लोग सोशल मीडिया पोस्ट, इंस्टाग्राम स्टोरी, वीडियो कॉल और ऑनलाइन मैसेज के जरिए अपने दोस्तों को खास महसूस कराते हैं।

दोस्ती को याद करने का खास मौका

फ्रेंडशिप डे सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है, बल्कि यह उन दोस्तों को धन्यवाद कहने का अवसर है जो बिना किसी स्वार्थ के जीवन में साथ खड़े रहते हैं। एक छोटा सा संदेश, फोन कॉल या साथ बिताया गया समय भी दोस्ती को और मजबूत बना सकता है। यही वजह है कि बदलते समय के साथ भी फ्रेंडशिप डे की लोकप्रियता और महत्व लगातार बना हुआ है।