FIFA World Cup 2026: दुनिया के सबसे बड़े और सबसे लोकप्रिय सिंगल स्पोर्टिंग इवेंट यानी फीफा वर्ल्ड कप की शुरुआत होने में अब कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं, जिस पर पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों की नजरें टिकी हुई हैं. इस साल का यह महाकुंभ बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि इस बार टूर्नामेंट में इतिहास की सबसे ज्यादा 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं. खेल जगत के इस सबसे बड़े महामुकाबले में शामिल होने वाली सभी टीमों की नजरें दुनिया की सबसे खूबसूरत और सबसे महंगी चमचमाती ट्रॉफी को जीतने पर टिकी होंगी, जिसके लिए मैदान पर कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी.
अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में सजेगा फुटबॉल का महामंच
इस बार फीफा वर्ल्ड कप 2026 की मेजबानी संयुक्त रूप से तीन बड़े देशों को सौंपी गई है, जिसमें अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा शामिल हैं. इन देशों के आलीशान स्टेडियमों में 12 जून से फुटबॉल के इस सबसे बड़े महामुकाबले का शंखनाद होने जा रहा है. टूर्नामेंट के नए प्रारूप के तहत इस बार कुल 48 टीमें मैदान पर अपनी किस्मत आजमाएंगी और दुनिया की सबसे मशहूर तथा सबसे महंगी ट्रॉफी के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश करेंगी. इस टूर्नामेंट को लेकर तीनों ही मेजबान देशों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं और दर्शकों का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच चुका है.
18 कैरेट शुद्ध सोने और मैलाकाइट पत्थरों से बनी है यह अनमोल ट्रॉफी
फुटबॉल के इस महासमर में दी जाने वाली चमचमाती ट्रॉफी दुनिया के किसी भी अन्य खेल की तुलना में सबसे ज्यादा महंगी और बेशकीमती मानी जाती है, जिसकी बनावट और खासियत आपको हैरान कर देगी. इस खूबसूरत ट्रॉफी का निर्माण 18 कैरेट शुद्ध सोने से किया गया है और इसे बनाने में लगभग 6.175 किलोग्राम ठोस सोने का इस्तेमाल हुआ है. इसके साथ ही इस वर्ल्ड कप ट्रॉफी की खूबसूरती को और ज्यादा निखारने के लिए इसके निचले हिस्से यानी बेस को बेहद दुर्लभ हरे रंग के ‘मैलाकाइट’ (Malachite) पत्थरों की दो मजबूत परतों से तैयार किया गया है, जो इसे एक अनोखा लुक देता है.
पांच करोड़ की निर्माण लागत वाली ट्रॉफी की मार्केट वैल्यू है 192 करोड़ रुपये
अगर हम इस ऐतिहासिक ट्रॉफी की असल कीमत की बात करें, तो इसके निर्माण में इस्तेमाल हुए शुद्ध सोने और मैलाकाइट पत्थरों की वास्तविक मैटेरियल कॉस्ट करीब 6,16,300 डॉलर है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 5.1 करोड़ रुपये बैठती है. मगर इस ट्रॉफी की ऐतिहासिक अहमियत और इसकी वैश्विक साख के कारण मौजूदा समय में इसकी मार्केट वैल्यू यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 2 करोड़ डॉलर आंकी गई है, जो भारतीय रुपयों के हिसाब से लगभग 192 करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े के बराबर है. यही कारण है कि यह दुनिया की सबसे महंगी स्पोर्ट्स ट्रॉफी है.
सुरक्षा कारणों से विजेता टीम को नहीं मिलती असली ट्रॉफी
इतनी ज्यादा कीमत और ऐतिहासिक महत्व होने की वजह से ही हर फीफा वर्ल्ड कप फाइनल मैच के खत्म होने के बाद यह असली ट्रॉफी जीतने वाली चैंपियन टीम को जश्न मनाने के लिए मैदान पर दी तो जाती है, लेकिन सुरक्षा कारणों से उसे तुरंत वापस ले लिया जाता है. इसके बाद इस असली ट्रॉफी को बेहद कड़ी सुरक्षा के बीच स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख शहर में स्थित फीफा (FIFA) के मुख्य हेडक्वार्टर की तिजोरी में वापस सुरक्षित रख दिया जाता है. वहीं, विश्व विजेता बनने वाली टीम को अपने देश ले जाने के लिए बिल्कुल असली जैसी दिखने वाली एक हूबहू रेप्लिका (नकल) ट्रॉफी दी जाती है, जिसे वे हमेशा अपने पास रखते हैं.
इटली के प्रसिद्ध मूर्तिकार ने बनाई थी यह डिजाइन, 52 सालों से जारी है सफर
इस बेहद खूबसूरत और प्रतिष्ठित वर्ल्ड कप ट्रॉफी को साल 1970 के दशक में इटली के एक बेहद मशहूर और हुनरमंद मूर्तिकार सिल्वियो गाजानिया ने बड़े ही चाव से डिजाइन किया था. इस नई कलाकृति वाली ट्रॉफी को सबसे पहली बार साल 1974 के फीफा वर्ल्ड कप में तत्कालीन विजेता टीम वेस्ट जर्मनी को सौंपा गया था. तब से लेकर आज तक, यानी पिछले 52 सालों से लगातार यही चमचमाती ट्रॉफी हर चार साल में दुनिया के नए फुटबॉल किंग को सम्मान के तौर पर प्रदान की जा रही है और इस बार भी इसे उठाने के लिए 48 देशों के खिलाड़ी अपना सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हैं.
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