FCRA Bill: विपक्ष के विरोध के बीच सरकार का बड़ा कदम, JPC को भेजा बिल

लोकसभा में भारी हंगामे और विपक्षी दलों के विरोध के बीच 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA) को दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया है।

FCRA Bill

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 12, 2026

FCRA Bill: संसद के मौजूदा सत्र के दौरान राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। लोकसभा में विपक्षी दलों के कड़े विरोध और भारी हंगामे के बीच सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ (FCRA Amendment Bill) को दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव आखिरकार मंजूर करा लिया है। सरकार के इस कदम से संसद के भीतर और बाहर सियासी हलचल काफी तेज हो गई है।

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विपक्ष का कड़ा विरोध और सरकार का पलटवार

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान जैसे ही इस बिल को जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव लाया गया, विपक्षी दलों ने इसका पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया। विपक्षी सांसदों ने न केवल इस प्रस्ताव का विरोध किया बल्कि सरकार से इस पूरे बिल को पूरी तरह से वापस लेने की मांग भी उठाई। विपक्षी दलों का तर्क था कि इस संशोधन विधेयक के प्रावधान कई मायनों में आपत्तिजनक हैं।

विपक्ष के विरोध का तीखा जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में विपक्षी दलों को खुली चुनौती दी। उन्होंने विपक्ष से दो टूक शब्दों में कहा कि वे इस FCRA बिल के भीतर ऐसा केवल एक भी प्रावधान या बिंदु सामने लाकर दिखाएं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ जाता हो। सरकार का पक्ष साफ था कि यह संशोधन देश की आंतरिक सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता के हित में है।

केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया प्रस्ताव

विवादों के बीच इस महत्वपूर्ण विधेयक को जेपीसी के पास भेजने का आधिकारिक प्रस्ताव केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा लोकसभा में पेश किया गया। सदन में जारी भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच ही यह प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

संसद द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, इस विशेष संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में कुल 31 सदस्य शामिल होंगे। समिति की संरचना के तहत 21 सदस्य लोकसभा से चुने जाएंगे जिन्हें लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नामित किया जाएगा, जबकि 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे जिन्हें राज्यसभा के सभापति द्वारा नामित किया जाएगा। इस प्रकार दोनों सदनों के चुनिंदा सांसदों का यह पैनल इस बिल के हर पहलू की बेहद बारीकी से जांच-पड़ताल करेगा।

शीतकालीन सत्र में सौंपी जाएगी रिपोर्ट

तय की गई रूपरेखा के अनुसार, यह संयुक्त समिति अपनी विस्तृत जांच पूरी करने के बाद संसद के आगामी शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर लोकसभा को सौंपेगी।

समिति की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए भी नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं। इसके तहत समिति की बैठकों के संचालन के लिए कोरम (गणपूर्ति) कुल सदस्य संख्या का लगभग एक-तिहाई निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, समिति की समस्त कार्यवाहियों को निर्बाध और पारदर्शी तरीके से चलाने के लिए संसदीय समितियों से जुड़े लोकसभा की कार्य-प्रक्रिया और कामकाज के सभी नियम पूरी तरह से प्रभावी रहेंगे। अब देखना यह होगा कि JPC की समीक्षा के बाद इस बहुचर्चित बिल के स्वरूप में क्या बदलाव आते हैं।

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