FCRA Bill: विदेशी अंशदान (नियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA Amendment Bill को लेकर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। सरकार इस प्रस्तावित विधेयक को विस्तृत समीक्षा और चर्चा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने को तैयार है। हालांकि, विपक्षी दल सरकार के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं। विपक्ष का कहना है कि केवल विधेयक की समीक्षा या उसमें संशोधन पर्याप्त नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार को इसे पूरी तरह वापस लेना चाहिए।
JPC में भेजने के प्रस्ताव पर विपक्ष असहमत
सरकार की ओर से FCRA संशोधन विधेयक को JPC के पास भेजने की तैयारी के बीच विपक्ष ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि विधेयक को संसदीय समिति में भेजकर चर्चा कराने से उनकी मूल आपत्ति दूर नहीं होगी। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित प्रावधानों का इस्तेमाल गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े संगठनों पर दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है।
कांग्रेस ने विधेयक के खिलाफ विरोध का ऐलान किया
कांग्रेस ने प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने रविवार को कहा कि अगर केंद्र सरकार इस विधेयक को संसद में पेश करती है, तो कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल इसका मजबूती से विरोध करेंगे। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ ही दिनों में विधेयक तैयार कर उसे संसद में पेश करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
केसी वेणुगोपाल ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
के.सी. वेणुगोपाल ने प्रस्तावित विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार अगर यह सोच रही है कि दो-तीन दिनों के भीतर Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill तैयार करके संसद में पेश किया जा सकता है, तो उसे इस विचार को अपने तक ही रखना चाहिए। कांग्रेस महासचिव ने संकेत दिया कि विपक्ष इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर सरकार का विरोध कर सकता है।
NGOs और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित FCRA कानून के जरिए अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों को निशाना बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि FCRA के तहत कानूनी तरीके से विदेशी अंशदान प्राप्त कर काम करने वाले संगठनों के लिए नए प्रतिबंध मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। विपक्ष का दावा है कि ऐसे संगठनों की गतिविधियों और विदेशी फंडिंग पर अतिरिक्त नियंत्रण लगाने से उनकी स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
RSS की विदेशी फंडिंग को लेकर भी कांग्रेस का सवाल
के.सी. वेणुगोपाल ने FCRA के तहत विदेशी फंडिंग हासिल करने वाले संगठनों पर प्रस्तावित पाबंदियों के संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठनों को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि विदेशी फंडिंग को लेकर इतने कड़े प्रावधान लाए जा रहे हैं, तो RSS से जुड़े संगठनों पर भी समान नियम लागू किए जाने चाहिए। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, “अगर आप में हिम्मत है, तो RSS पर नियंत्रण करके दिखाइए।”
संसद में FCRA Bill को लेकर बढ़ सकती है हलचल
FCRA संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद अब संसद में भी दिखाई देने की संभावना है। एक ओर सरकार विधेयक को JPC के जरिए विस्तृत जांच और चर्चा का रास्ता अपनाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष इसकी वापसी की मांग पर अड़ा हुआ है। ऐसे में यदि सरकार विधेयक को संसद में आगे बढ़ाती है, तो इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिरोध और तेज होने के आसार हैं।
विपक्ष की मांग पर सरकार का रुख अहम
अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार FCRA संशोधन विधेयक को लेकर आगे क्या रणनीति अपनाती है। क्या सरकार विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद विधेयक को संसद में पेश करेगी या JPC के जरिए सहमति बनाने का प्रयास करेगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल FCRA Bill को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव गहराता नजर आ रहा है।
Read More : Haryana News: महिलाओं के खातों में पहुंची बड़ी रकम, लाडो लक्ष्मी योजना की 10वीं किस्त जारी










