Farooq Abdullah News: नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन के 12 साल पूरे होने पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू 17 वर्षों तक इस पद पर रहे थे। उनके मुकाबले पीएम मोदी को अभी सिर्फ 12 साल ही हुए हैं। अब्दुल्ला ने तंज कसते हुए कहा कि नेहरू के उस कार्यकाल के रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए वर्तमान प्रधानमंत्री को अभी एक बहुत लंबा और कठिन रास्ता तय करना बाकी है।
PoJK में मानवाधिकारों का हनन
बताते चले कि, फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी मौजूदा हिंसा और चरमराती राजनीतिक व्यवस्था पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वहां चारों तरफ अस्थिरता का माहौल है और बेकसूर लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। डॉ. अब्दुल्ला ने वैश्विक मंचों का ध्यान खींचते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति (UNHRC) से अपील की है कि वे वहां के नागरिकों की सुरक्षा के लिए तुरंत दखल दें।
संयुक्त राष्ट्र से लगाई गुहार
PoJK की बदतर स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “वहां आम जनता पर भयंकर ज़ुल्म ढाया जा रहा है और कई लोग अब तक शहीद हो चुके हैं।” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) से पुरजोर गुजारिश की कि उनकी टीम को तुरंत वहां का दौरा करना चाहिए। यूएन की जांच से ही दुनिया के सामने यह साफ हो पाएगा कि वहां के नागरिकों को किन-किन अमानवीय मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए
फारूक अब्दुल्ला ने पड़ोसी क्षेत्र की स्थिति को जम्मू-कश्मीर के मौजूदा राजनीतिक हालात से भी जोड़ा। उन्होंने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि फिलहाल सत्ता बंटी हुई है और नेता बेहद मुश्किल हालातों में काम कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासन की कमान लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) के दफ्तर के बजाय जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के हाथों में होनी चाहिए।
दिल्ली में मानसून सत्र के दौरान विरोध प्रदर्शन
जम्मू-कश्मीर को दोबारा पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की अपनी मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अब दिल्ली कूच करने का फैसला किया है। फारूक अब्दुल्ला ने ऐलान किया कि संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले ही दिन उनकी पार्टी नई दिल्ली में संसद भवन के सामने एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी।
विपक्षी एकजुटता पर दो टूक
इस आंदोलन में विपक्षी दलों को शामिल करने के सवाल पर अब्दुल्ला ने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी किसी भी राजनीतिक दल को “प्लेट में परोसकर” औपचारिक न्योता नहीं भेजेगी। जो भी दल जम्मू-कश्मीर के हक की इस लड़ाई में साथ आना चाहता है, वह अपनी मर्जी से इस प्रदर्शन का हिस्सा बन सकता है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जब तक इंसाफ नहीं मिलता, राज्य के सम्मान की यह लड़ाई जारी रहेगी।










