शादी से लौटते वक्त गायब हुआ परिवार, 26 साल बाद नहर से मिला वैन का मलबा

रूपनगर  पंजाब के रूपनगर जिले में भाखड़ा नहर के पानी ने 26 साल पुराने एक गहरे जख्म को हरा कर दिया है. अक्टूबर 2000 में एक शादी समारोह से लौटते समय लापता हुई मारुति ओमनी वैन को स्थानीय गोताखोरों की मदद से बाहर निकाल लिया गया है. 32 फुट गहरे पानी में दफन यह गाड़ी अपने साथ उस परिवार की आखिरी निशानियां भी लेकर बाहर आई है, जो दो दशक पहले अचानक गायब हो गया था।  दरअसल, बीते दिनों गोताखोर कमलप्रीत सैनी नक्कियां गांव के पास एक अन्य शव की तलाश में नहर में उतरे थे. इसी दौरान उनकी नजर

Wrriten By :

Editor

Published On :

मई 22, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

रूपनगर 

पंजाब के रूपनगर जिले में भाखड़ा नहर के पानी ने 26 साल पुराने एक गहरे जख्म को हरा कर दिया है. अक्टूबर 2000 में एक शादी समारोह से लौटते समय लापता हुई मारुति ओमनी वैन को स्थानीय गोताखोरों की मदद से बाहर निकाल लिया गया है. 32 फुट गहरे पानी में दफन यह गाड़ी अपने साथ उस परिवार की आखिरी निशानियां भी लेकर बाहर आई है, जो दो दशक पहले अचानक गायब हो गया था। 

दरअसल, बीते दिनों गोताखोर कमलप्रीत सैनी नक्कियां गांव के पास एक अन्य शव की तलाश में नहर में उतरे थे. इसी दौरान उनकी नजर पानी के नीचे दबे लोहे के एक ढांचे पर पड़ी। 

लंबे समय तक पानी में रहने के कारण वैन की छत और पिछला हिस्सा पूरी तरह गल चुका था. सिर्फ आगे का कुछ हिस्सा ही सुरक्षित बचा था। वैन के अगले हिस्से की तलाशी लेने पर सैनी को कुछ इंसानी कंकाल और एक बच्चे की छोटी सी शर्ट मिली. माना जा रहा है कि यह उस 8 साल के बच्चे की है जो इस हादसे का शिकार हुआ था। 

परिजनों ने हार नहीं मानी। खेत बिके, पैसे खर्च हुए, प्राइवेट गोताखोर लगाए गए, नहरें खंगाली गईं, लेकिन हर कोशिश खाली हाथ लौटती रही। धीरे-धीरे वक्त बीतता गया और लोगों ने इसे एक ऐसी गुमशुदगी मान लिया, जिसका सच शायद कभी सामने नहीं आएगा। लेकिन किसे पता था कि 26 साल बाद पानी की गहराई ऐसा राज उगल देगी, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया।

यह कहानी साल 2000 की है, जब कोटला गांव निवासी मुन्नी लाल, तेज राम, सुरजीत सिंह और सुरजीत का 8 साल का बेटा कालू एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। वे तेज राम की उसी वैन में सवार थे, जिसे उन्होंने हादसे से करीब एक महीना पहले ही जमीन बेचकर खरीदा था। लेकिन उस रात चारों कभी घर नहीं पहुंचे। परिवार ने तलाश शुरू की, पुलिस से लेकर निजी स्तर तक हर कोशिश की गई, मगर गाड़ी और लोगों का कोई सुराग नहीं मिला।

फिर कल एक दूसरे मामले में गोताखोर भाखड़ा नहर में उतरे। तलाशी के दौरान नहर की गहराई में उन्हें एक पुरानी वैन दिखाई दी। जैसे ही वैन को बाहर निकाला गया, सबकी सांसें थम गईं। अंदर से कंकाल, यूनिफॉर्म और कई पुराने सामान मिले। इसके बाद एक-एक कड़ी जुड़ती चली गई और सामने आया कि यह वही वैन थी, जो 26 साल पहले रहस्यमयी तरीके से गायब हुई थी।

प्रारंभिक अनुमान है कि अंधेरे में लौटते समय वैन अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई होगी और अंदर बैठे चारों लोग बाहर नहीं निकल सके। पानी की तेज धारा और गहराई के कारण वाहन कभी नजर ही नहीं आया। जिस परिवार ने वर्षों तक अपने लोगों के लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी, उन्हें अब 26 साल बाद ऐसा सच मिला जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। गांव में इस खुलासे के बाद हर कोई स्तब्ध है और लोग इसे “26 साल बाद पानी से निकला दर्दनाक सच” कह रहे हैं।

अक्टूबर 2000 की वो मनहूस रात 
घटना कोटला गांव के एक परिवार से जुड़ी है. साल 2000 में तीन पुरुष और एक 8 साल का बच्चा शादी से लौट रहे थे, तभी उनकी वैन बेकाबू होकर भाखड़ा नहर में जा गिरी। 

सर्च ऑपरेशन फेल हुआ 
उस समय पेशेवर गोताखोरों ने महीनों तक नहर की खाक छानी थी, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि न तो गाड़ी मिली और न ही शव। 

परिजनों का अनुरोध
अब गोताखोर सैनी ने जब कोटला गांव के पीड़ित परिवार से संपर्क किया, तो उन्होंने नम आंखों से गाड़ी बाहर निकालने का अनुरोध किया. ट्रैक्टरों और स्थानीय लोगों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद मलबे को बाहर खींचा गया। 

अंतिम विदाई: प्रार्थना सभा के साथ दी गई शांति
दशकों के इंतजार के बाद जब अपनों की निशानियां और अस्थियां मिलीं, तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई। 

गोताखोर कमलप्रीत सैनी ने बताया, "नहर की तलहटी में बहाव बहुत तेज था, वैन को बाहर निकालना नामुमकिन-सा काम था, लेकिन परिवार की भावनाओं के लिए हमने यह जोखिम उठाया। 

मंगलवार को कीरतपुर साहिब में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई. 26 साल बाद परिवार को यह संतोष मिला कि अब उनके प्रियजनों का अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन धार्मिक रीति-रिवाजों से हो सकेगा। 

2