Congress Exit Poll 2026: बंगाल और असम में कांग्रेस का सूपड़ा साफ? एग्जिट पोल के इन नतीजों ने सबको चौंकाया

5 राज्यों के एग्जिट पोल के रुझानों ने कांग्रेस के लिए मिली-जुली तस्वीर पेश की है। जहां केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों में पार्टी की स्थिति मजबूत नजर आ रही है, वहीं पश्चिम बंगाल और असम में भारी गिरावट देखी गई है। उत्तर भारत और पूर्वोत्तर में सिमटते जनाधार के बीच क्या कांग्रेस दक्षिण के सहारे वापसी कर पाएगी? विस्तार से पढ़ें।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 30, 2026

Congress Exit Poll 2026: 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद आए एग्जिट पोल के रुझानों (Exit Poll Predictions) ने देश की सबसे पुरानी पार्टी, कांग्रेस के लिए एक मिली-जुली तस्वीर पेश की है। चुनावी विश्लेषणों से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी एक तरफ जहां दक्षिण भारत के अपने किलों को बचाने और नए क्षेत्रों पर कब्जा करने में सफल हो रही है, वहीं उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में उसकी चुनावी जमीन (Political Ground) खिसकती नजर आ रही है।

केरल और कर्नाटक में कांग्रेस की मजबूत पकड़

बताते चले कि, दक्षिण भारत से कांग्रेस के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। कर्नाटक की सत्ता में पहले से काबिज होने के बाद, अब केरल में भी ‘हाथ’ का जादू चलता दिख रहा है। एग्जिट पोल के अनुसार, केरल में मौजूदा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency Factor) का सीधा फायदा कांग्रेस को मिल रहा है। यदि ये अनुमान नतीजों में बदलते हैं, तो कांग्रेस केरल की सत्ता में शानदार वापसी करेगी, जिससे दक्षिण भारत में पार्टी की पकड़ और अधिक मजबूत हो जाएगी।

तमिलनाडु में DMK-कांग्रेस की संभावित वापसी

पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में भी कांग्रेस के लिए राजनीतिक समीकरण (Political Equations) अनुकूल नजर आ रहे हैं। एग्जिट पोल का दावा है कि वहां डीएमके (DMK) के नेतृत्व वाला गठबंधन एक बार फिर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की दहलीज पर खड़ा है। कांग्रेस इस गठबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका अर्थ यह है कि राज्य में सरकार बदलने के बावजूद कांग्रेस सत्ता में भागीदारी (Power Sharing) बनाए रखने में सफल होगी। यह पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

पश्चिम बंगाल और असम में प्रदर्शन निराशाजनक

दक्षिण की सफलता के विपरीत, पूर्वी भारत में कांग्रेस की चुनावी स्थिति (Electoral Standing) काफी चिंताजनक है। पश्चिम बंगाल, जो कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था, वहां पार्टी महज 2 सीटों तक सिमटती दिख रही है। इसी तरह, असम में भी कांग्रेस की आक्रामक कैंपेनिंग का कोई खास असर पड़ता नहीं दिख रहा है। मुख्यमंत्री और भाजपा पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद, पार्टी वहां 30 सीटों के आंकड़े को छूने के लिए भी संघर्ष करती नजर आ रही है।

पुडुचेरी में कमजोर पड़ता जनाधार

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी कांग्रेस के लिए चुनावी संभावनाएं (Election Prospects) धूमिल होती दिख रही हैं। सर्वेक्षणों के मुताबिक, पार्टी यहां 10 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। स्थानीय नेतृत्व और संगठनात्मक कमियों के कारण पुडुचेरी में कांग्रेस का जनाधार लगातार गिरता जा रहा है, जो पार्टी आलाकमान के लिए मंथन का विषय है।

कांग्रेस का सिमटता भौगोलिक विस्तार

एग्जिट पोल के व्यापक आंकड़ों का विश्लेषण करें तो कांग्रेस की स्थिति राष्ट्रीय स्तर (National Perspective) पर असंतुलित दिखती है। गुजरात से लेकर असम तक और उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में पार्टी की मौजूदगी सिमटती जा रही है। उत्तर भारत में कांग्रेस के लिए अब गिने-चुने राज्य ही बचे हैं। हालांकि, दक्षिण भारत के परिणाम कांग्रेस के लिए एक जीवनदान (Lifeline) साबित हो सकते हैं, लेकिन हिंदी बेल्ट और पूर्वोत्तर में अपनी खोई हुई साख वापस पाना पार्टी के लिए आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती होगी।