EU IRGC Terrorist: यूरोपीय संघ का बड़ा प्रहार, ईरान की IRGC को ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित किया, तेहरान की बढ़ी मुश्किलें

यूरोपीय संघ ने दशकों की हिचकिचाहट के बाद आखिरकार ईरान की IRGC को आतंकी संगठन मान लिया है। फ्रांस के रुख बदलने और प्रदर्शनकारियों पर क्रूर कार्रवाई के सबूतों ने इस फैसले को अनिवार्य बना दिया। क्या इस कदम से ईरान और पश्चिम के बीच महायुद्ध छिड़ जाएगा या तेहरान घुटने टेकेगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 29, 2026

EU IRGC Terrorist: अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और हमास जैसी आतंकी संगठनों की सूची में शामिल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। यूरोपीय कमीशन की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने गुरुवार को कहा कि IRGC ने ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान 6373 लोगों की हत्या की है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “अगर आप आतंकवादी की तरह कार्य करते हैं, तो आपके साथ आतंकवादी की तरह ही व्यवहार किया जाना चाहिए।” यह कदम ईरान के खिलाफ कड़े अंतरराष्ट्रीय दबाव का संकेत माना जा रहा है।

27 सदस्य देशों का समर्थन जरूरी

काजा कल्लास ने स्पष्ट किया कि इस निर्णय को लागू करने के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों का समर्थन अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया के बाद ही IRGC को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन की सूची में शामिल किया जाएगा। शुरुआत में फ्रांस इस कदम का विरोध कर रहा था। फ्रांस को यह डर था कि इससे ईरान में फंसे फ्रांसीसी नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है और ईरान के साथ बातचीत के मार्ग बंद हो सकते हैं।

फ्रांस का रुख बदलने के बाद समर्थन बढ़ा

हालांकि, बाद में फ्रांस ने अपना रुख बदल लिया और इस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट ने कहा, “ईरान में शांतिपूर्ण विरोध पर हुए बर्बर दमन का जवाब देना जरूरी है। अपराधों के लिए कोई माफी नहीं हो सकती।” फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी इस समर्थन की पुष्टि की। वहीं, इटली, स्पेन और जर्मनी पहले से ही इस कदम के पक्ष में थे। अब यूरोपीय संघ की अधिकांश प्रमुख शक्तियों ने IRGC को आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव का समर्थन कर दिया है।

IRGC: ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य शाखा

IRGC ईरान की सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली सैन्य इकाई है। इसे 1979 में आयतुल्लाह खुमैनी ने इस्लामिक रिवॉल्यूशन की रक्षा के लिए बनाया था। यह नियमित सेना से अलग कार्य करता है और सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है। IRGC की पकड़ ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति में बहुत मजबूत है। इसके कारण ही अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया पहले ही इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं।

EU के फैसले का ईरान पर प्रभाव

ईरान रूस का करीबी सहयोगी है और पश्चिम विरोधी नीति अपनाता है। ऐसे में EU का यह फैसला ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और राजनीतिक चुनौती बढ़ाएगा। IRGC के सदस्यों को EU देशों में प्रवेश से रोका जा सकता है, साथ ही उनके यूरोपीय एसेट्स को फ्रीज किया जा सकता है। इस कदम से ईरान की विदेश नीति और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी प्रतिक्रिया

विशेषज्ञों का मानना है कि EU का यह निर्णय ईरान की अंतरराष्ट्रीय छवि और सुरक्षा नीति पर गहरा असर डाल सकता है। IRGC को आतंकवादी घोषित करने का संदेश सिर्फ ईरान के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्य देशों में मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ भी सख्त प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम ईरान और पश्चिमी देशों के बीच भविष्य की कूटनीतिक बातचीत को भी प्रभावित कर सकता है।इस प्रकार, EU ने IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित कर ईरान पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे मध्यपूर्व की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नई चुनौती पैदा हो सकती है।

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