Farmers Crisis: देश के कई हिस्सों में कम बारिश और बदलते मौसम का असर अब कृषि के साथ-साथ बिजली व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कमजोर मानसून के बाद जलाशयों में पानी का स्तर घटा है, वहीं तापमान बढ़ने से बिजली की मांग में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में बिजली उत्पादन और खपत के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। रबी सीजन की शुरुआत के साथ किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत और बढ़ने की संभावना है। यदि बिजली की मांग इसी तरह बढ़ती रही और उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि नहीं हुई, तो आने वाले समय में कई राज्यों में बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
सितंबर में बिजली की कमी में तेज बढ़ोतरी
ग्रिड-इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में देश में बिजली की कमी करीब 54.4 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई। अगस्त में यह आंकड़ा लगभग 9.8 करोड़ यूनिट था। यानी एक महीने में बिजली की कमी में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में शाम के समय बिजली की कमी सबसे अधिक करीब 7.7 गीगावॉट तक पहुंच गई। अक्टूबर की शुरुआत में गर्मी और उमस के कारण पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बढ़ने से मांग पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए भी किसानों की निर्भरता बिजली पर बढ़ी है। इससे कृषि क्षेत्र और घरेलू बिजली खपत दोनों तरफ से मांग बढ़ रही है।
जलाशयों में घटा पानी, हाइड्रो पावर पर असर

केंद्रीय जल आयोग के 28 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 178 प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी का भंडारण उनकी कुल क्षमता का करीब 70 फीसदी रह गया था। यह पिछले 10 वर्षों के औसत 76.62 फीसदी से कम है। जलाशयों में पानी कम होने का सीधा असर जल विद्युत उत्पादन पर पड़ सकता है। हाइड्रो पावर से उत्पादन घटने पर बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए ताप बिजली संयंत्रों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
कोयले के स्टॉक ने बढ़ाई मुश्किल
ताप बिजली पर बढ़ती निर्भरता के बीच कोयले की उपलब्धता भी चिंता का कारण बन रही है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, 27 सितंबर तक देश के 168 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में से 72 के पास कोयले का स्टॉक तय मानक के 25 फीसदी से नीचे था। इस दौरान कुल कोयला भंडार करीब 1.92 करोड़ टन था, जबकि जरूरत लगभग 5.37 करोड़ टन बताई गई। 30 सितंबर तक कम कोयला स्टॉक वाले बिजली संयंत्रों की संख्या बढ़कर 84 हो गई।
यूपी, पंजाब और हरियाणा में भी दबाव
उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी बिजली व्यवस्था पर दबाव देखा गया। सितंबर के आंकड़ों में पंजाब में करीब 911.5 लाख यूनिट, उत्तर प्रदेश में 430.5 लाख यूनिट और राजस्थान में 371.3 लाख यूनिट बिजली की कमी दर्ज की गई। इन राज्यों के कई ताप बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार भी निर्धारित स्तर से नीचे रहा।
हिमाचल में उत्पादन घटने से संकट गहराया

हिमाचल प्रदेश में कम बारिश के कारण जल विद्युत परियोजनाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ है। राज्य में रोजाना करीब 280 से 300 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि खपत 380 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गई है। इस तरह रोजाना लगभग 80 से 100 लाख यूनिट की कमी सामने आ रही है। कम बारिश, घटते जल भंडार, बढ़ती बिजली मांग और कोयले के सीमित स्टॉक के बीच आने वाला रबी सीजन बिजली व्यवस्था के लिए अहम साबित हो सकता है। खासकर सिंचाई की मांग बढ़ने पर राज्यों की बिजली जरूरत और बढ़ने की संभावना है।
Weather Update: यूपी में आसमान से आफत, 46 जिलों में बारिश का अलर्ट, 56










