ED raid I-PAC Kolkata: कोलकाता में चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था IPAC के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद देश का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस कार्रवाई के विरोध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का जोरदार साथ मिला है। अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह छापेमारी इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि भाजपा बंगाल में बुरी तरह हार रही है। उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से संदेश दिया कि विपक्षी नेताओं और उनसे जुड़ी संस्थाओं को निशाना बनाकर भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसकी यह साजिश पूरी तरह फेल हो जाएगी।
2027 की भविष्यवाणी: बंगाल के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की विदाई तय
लखनऊ में पत्रकारों से चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने न केवल बंगाल चुनाव, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी बड़ी भविष्यवाणी की। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज करेंगी। उन्होंने आगे जोड़ा कि भाजपा की साजिशों का दौर अब खत्म होने वाला है। अखिलेश के अनुसार, “भाजपा हर जगह साजिश रचती है, लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है। पहले वे बंगाल का चुनाव हारेंगे और उसके बाद 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी उनकी विदाई तय है।” उनके इस बयान ने यूपी की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है।
वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) पर विवाद: अखिलेश ने योगी सरकार को घेरा
राजनीतिक उठापटक के बीच अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार चुनाव आयोग के अधिकारियों पर दबाव बना रही है। अखिलेश ने कहा कि जब मुख्यमंत्री स्वयं चार करोड़ वोट काटने की बात करते हैं, तो वे परोक्ष रूप से अधिकारियों को हेरफेर करने का निर्देश दे रहे होते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग (EC) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार के आंकड़ों और SIR के आंकड़ों में विसंगति है, तो आयोग को पूरी रिवीजन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर विचार करना चाहिए ताकि लोकतंत्र सुरक्षित रहे।
विपक्षी एकजुटता: अभिषेक मनु सिंघवी और संजय सिंह ने बोला हमला
IPAC पर हुई रेड को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का समर्थन किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रख्यात वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे ‘भाजपा की जबरदस्ती की प्लेबुक’ का एक और अध्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि जब एजेंसियां सच्चाई और तथ्यों पर रेड करने में विफल रहती हैं, तो वे राजनीतिक सलाहकारों को हथियार बनाती हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बंगाल है, वेनेजुएला नहीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री चुनावी मैदान में ममता बनर्जी से नहीं जीत पाते, तो वे ईडी जैसी एजेंसियों का सहारा लेते हैं। उन्होंने टीएमसी कार्यालय पर कार्रवाई को ‘लोकतंत्र’ के बजाय ‘लूटतंत्र’ बताया।
एजेंसियों का ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल: लोकतंत्र के लिए खतरा?
कोलकाता की इस रेड ने एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग की बहस को हवा दे दी है। टीएमसी के नेताओं का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले जानबूझकर उनके रणनीतिकारों को परेशान किया जा रहा है ताकि उनके चुनाव प्रचार और योजना को बाधित किया जा सके। अखिलेश यादव, संजय सिंह और सिंघवी जैसे नेताओं का एक सुर में बोलना यह दर्शाता है कि 2026 के चुनावों से पहले विपक्षी खेमा भाजपा के खिलाफ एकजुट हो रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और अधिक गरमाने की उम्मीद है, क्योंकि ममता बनर्जी ने भी इस कार्रवाई के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
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