Election Commission: चुनाव आयोग का बड़ा डिजिटल धमाका, अब पार्टियों को नहीं काटने होंगे दफ्तरों के चक्कर

2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले चुनाव आयोग ने 'डिजिटल टाइम वाउचर' पोर्टल लॉन्च कर दिया है। अब राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों को दूरदर्शन-आकाशवाणी पर प्रचार के लिए 45 मिनट का आधार समय डिजिटल रूप से मिलेगा। क्या यह नई तकनीक चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता की तस्वीर पूरी तरह बदल देगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 23, 2026

Election Commission: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए दूरदर्शन और आकाशवाणी पर निःशुल्क ब्रॉडकास्ट और टेलीकास्ट समय के आवंटन हेतु ‘डिजिटल वाउचर’ जारी किए हैं। वर्तमान में यह व्यवस्था असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे चुनावी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की गई है। इस नई प्रणाली का उद्देश्य चुनावी प्रचार के दौरान तकनीकी बाधाओं को कम करना और पार्टियों को समान अवसर प्रदान करना है।

कागजी कार्रवाई से मुक्ति: अब आयोग के दफ्तर जाने की जरूरत नहीं

पहले की व्यवस्था के अनुसार, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को चुनाव आयोग के कार्यालय जाकर भौतिक रूप से ‘कागजी वाउचर’ प्राप्त करने पड़ते थे। इस प्रक्रिया में न केवल समय की बर्बादी होती थी, बल्कि जटिल कागजी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ता था। अब चुनाव आयोग ने इसे पूरी तरह से डिजिटल कर दिया है। राजनीतिक दल अब सीधे आईटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने ‘टाइम वाउचर’ प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 39A के प्रावधानों के तहत दी गई है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सभी प्रमुख दल जनता तक अपनी नीतियों और संदेशों को प्रभावी ढंग से पहुँचा सकें।

समय का आवंटन और समय सीमा: मतदान से दो दिन पहले तक की अवधि

विधानसभा चुनावों के प्रत्येक चरण के लिए समय का निर्धारण एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। आकाशवाणी (AIR) और दूरदर्शन पर प्रसारण की अवधि, उम्मीदवारों की अंतिम सूची प्रकाशित होने की तिथि से शुरू होकर मतदान की तारीख से ठीक दो दिन पहले तक प्रभावी रहेगी। खास बात यह है कि प्रसारण का वास्तविक समय किसी पक्षपात के बिना तय किया जाएगा। इसके लिए संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ‘लॉटरी’ निकाली जाएगी, जिससे यह तय होगा कि किस दल का संदेश किस समय प्रसारित होगा।

न्यूनतम 45 मिनट का आधार समय: प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा एक्स्ट्रा स्लॉट

इस योजना के अंतर्गत, प्रत्येक मान्यता प्राप्त दल को दूरदर्शन और आकाशवाणी दोनों पर कम से कम 45 मिनट का ‘बेस टाइम’ (आधार समय) निःशुल्क प्रदान किया गया है। यह सुविधा क्षेत्रीय नेटवर्क पर समान रूप से उपलब्ध होगी। इसके अतिरिक्त, जिन दलों ने पिछले विधानसभा चुनावों में बेहतर चुनावी प्रदर्शन किया है, उन्हें उनके वोट शेयर और सीटों के आधार पर ‘अतिरिक्त समय’ भी आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था छोटे और बड़े दोनों प्रकार के दलों के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास करती है ताकि लोकतंत्र की आवाज हर कोने तक पहुँच सके।

प्रसारण के नियम और तकनीकी मानक: रिकॉर्डिंग के लिए सख्त गाइडलाइन्स

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक दलों को प्रसारण से पहले अपनी रिकॉर्डिंग और लिखित प्रतिलेख (Transcripts) जमा करने होंगे। पार्टियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सामग्री आयोग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन न करे। रिकॉर्डिंग के लिए प्रसार भारती द्वारा तय किए गए उच्च तकनीकी मानकों का पालन करना अनिवार्य है। दल अपनी रिकॉर्डिंग या तो दूरदर्शन/आकाशवाणी के केंद्रों पर कर सकते हैं या फिर उन निजी स्टूडियो में जो निर्धारित मानकों को पूरा करते हों। इसके अलावा, प्रसार भारती दो पैनल चर्चाओं या वाद-विवाद कार्यक्रमों का भी आयोजन करेगा, जहाँ प्रत्येक दल अपना एक प्रतिनिधि भेज सकेगा।

सुगम और निष्पक्ष चुनाव की दिशा में सार्थक प्रयास

डिजिटल वाउचर की यह पहल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है (कागज की बचत के कारण), बल्कि यह चुनावी प्रबंधन में दक्षता भी लाती है। चुनाव आयोग का यह डिजिटल बदलाव यह सुनिश्चित करता है कि चुनावी मैदान में सभी खिलाड़ियों को अपनी बात रखने के लिए एक ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ मिले। तकनीक के इस समावेश से चुनावी प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और राजनीतिक दलों के लिए प्रचार की राह आसान होगी।

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