E20 Petrol: E20 पेट्रोल पर सरकार का रुख स्पष्ट, गडकरी बोले- शुद्ध पेट्रोल सस्ता नहीं मिलेगा

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल ईंधन (E20) नीति में अपने निजी हितों के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

E20 Petrol

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 15, 2026

E20 Petrol: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20) को लेकर चल रहे विवाद और अपने परिवार पर लग रहे आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के पीछे उनका कोई व्यक्तिगत या पारिवारिक हित नहीं है। गडकरी ने कहा कि वह शुरू से ही प्रदूषण मुक्त और स्वदेशी विकल्पों के प्रबल समर्थक रहे हैं, और उनका लक्ष्य केवल इथेनॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि वे हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और अन्य सभी प्रकार के वैकल्पिक ईंधनों के विकास पर जोर दे रहे हैं।

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‘बेटों के बिजनेस पर 1600 करोड़ का कर्ज, फैलाया जा रहा है झूठ’

एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में नितिन गडकरी ने अपने बेटों के व्यवसाय और इथेनॉल उत्पादन से जुड़े आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के पास चीनी मिलें काफी लंबे समय से हैं, जिन्हें अब उनके बेटे संभालते हैं।

गडकरी की सफाई: “इथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) का पूरा कार्यक्रम पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है, इसमें मेरी कोई भूमिका या हस्तक्षेप नहीं है। मेरे बेटों के कुल व्यापार में इथेनॉल की हिस्सेदारी मात्र 10 प्रतिशत ही है। अगर पूरे देश के स्तर पर देखें, तो देश के कुल इथेनॉल उत्पादन में मेरे बेटों की फैक्ट्रियों का योगदान 0.5 प्रतिशत से भी कम है। इसके विपरीत, इन कंपनियों पर वर्तमान में 1600 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज भी है। ऐसे में निजी मुनाफे की बातें पूरी तरह निराधार और झूठी हैं।”

केवल गन्ने से नहीं, पराली और बांस से भी बन रहा है इथेनॉल

केंद्रीय मंत्री ने वैकल्पिक ईंधन की वकालत करने के पीछे देश की आर्थिक और पर्यावरणीय जरूरतों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भारत कच्चे तेल के आयात पर बहुत बड़ी धनराशि खर्च करता है, जिसे रोकने की जरूरत है।

गडकरी ने साफ किया कि वे केवल गन्ने से बनने वाले इथेनॉल के पक्षधर नहीं हैं। इसकी शुरुआत मक्के से हुई थी, और आज देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग स्रोतों से इसका उत्पादन हो रहा है। उदाहरण के लिए, पानीपत में पराली (धान के अवशेष) से इथेनॉल बनाया जा रहा है, तो असम में बांस के जरिए और कई अन्य राज्यों में खराब चावल से इसका निर्माण हो रहा है। उन्होंने वैश्विक उदाहरण देते हुए कहा कि ब्राजील जैसे देश दशकों से सफलता के साथ इथेनॉल का इस्तेमाल कर रहे हैं और वहां वाहनों में कोई समस्या नहीं आई है।

शुद्ध पेट्रोल चाहिए तो जेब ढीली करने को रहें तैयार

जब केंद्रीय मंत्री से सवाल किया गया कि क्या उन वाहन मालिकों के लिए 100% शुद्ध पेट्रोल (बिना मिश्रण वाला) उपलब्ध कराया जाएगा जो E20 ईंधन नहीं चाहते, तो उन्होंने सीधा जवाब दिया। गडकरी ने कहा कि यदि किसी को शत-प्रतिशत पेट्रोल ही खरीदना है, तो उन्हें इसके लिए बाजार में काफी ज्यादा कीमत चुकानी होगी।

उन्होंने बताया कि E85 (85% इथेनॉल मिश्रण) की कीमत E20 ईंधन से भी काफी कम बैठती है, जो उपभोक्ताओं के लिए किफायती है। गडकरी ने अंत में कहा कि जहां पश्चिम एशियाई देशों और अमेरिका के पास तेल के असीमित भंडार हैं, वहीं इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे एशियाई देश भी अब तेजी से बायोफ्यूल (जैव ईंधन) की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, जो कि भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है।

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