Delhi SIR : दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियों और पिछली पुनरीक्षण सूची से मैपिंग नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इनमें पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना देसाई, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एसएस संधू समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में करीब 33.13 लाख मतदाताओं को विभिन्न तरह की विसंगतियों के संबंध में नोटिस दिए जा रहे हैं।
रंजना देसाई और परिवार के तीन सदस्यों को नोटिस
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना देसाई और उनके परिवार के तीन अन्य सदस्यों को भी SIR के तहत नोटिस मिला है। इनमें उनके पति प्रकाश देसाई, बेटे और अधिवक्ता माइक देसाई तथा बहू साक्षी देसाई शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार चारों रिकॉर्ड को “Unmapped with Last SIR” श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ है कि मौजूदा रिकॉर्ड पिछली SIR सूची से लिंक नहीं हो पाया।

पूर्व सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी का रिकॉर्ड भी फ्लैग
पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का नाम भी SIR के दौरान नोटिस पाने वाले प्रमुख लोगों में शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार उनके रिकॉर्ड को पिछली SIR सूची से मैपिंग नहीं होने के कारण जांच के लिए चिह्नित किया गया। SIR के तहत ऐसे मामलों में मतदाता विवरण और संबंधित दस्तावेजों की दोबारा पुष्टि की जाती है।
जगदीप धनखड़ और पत्नी को भी नोटिस
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ के नाम भी नोटिस सूची में शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार उनके मतदाता रिकॉर्ड में उपराष्ट्रपति आवास का पता दर्ज है और दोनों के रिकॉर्ड को पिछली SIR सूची से मैपिंग से जुड़ी श्रेणी में चिह्नित किया गया। अधिकारियों की ओर से ऐसे रिकॉर्ड की जांच प्रक्रिया के तहत की जा रही है।

चुनाव आयुक्त एसएस संधू के रिकॉर्ड में नाम की विसंगति
चुनाव आयुक्त एसएस संधू का रिकॉर्ड भी SIR के दौरान जांच के दायरे में आया। रिपोर्टों के मुताबिक उनके नाम से संबंधित विसंगति के कारण नोटिस जारी किया गया था। हालांकि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद अधिकारियों ने उनके रिकॉर्ड को वैध माना और अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने की पुष्टि की। उनके बेटे दमनबीर के रिकॉर्ड में माता-पिता के नाम से जुड़ी विसंगति भी बताई गई है।
कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के नाम भी शामिल
SIR नोटिस सूची में केवल इन प्रमुख हस्तियों के नाम नहीं हैं। रिपोर्टों के मुताबिक विदेश मंत्री एस जयशंकर, उनकी पत्नी क्योको जयशंकर, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश सचिव विक्रम मिसरी, CBI निदेशक प्रवीण सूद, पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व NITI Aayog उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया और SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे समेत कई वरिष्ठ लोगों के रिकॉर्ड भी फ्लैग किए गए हैं।
जॉन ब्रिटास के परिवार के रिकॉर्ड में अलग-अलग विसंगतियां
सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास की पत्नी शीबा ब्रिटास और बेटे आनंद ब्रिटास के रिकॉर्ड भी SIR जांच में सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार शीबा के मामले में “Self Name Mismatch” यानी नाम में असंगति दर्ज की गई, जबकि आनंद के रिकॉर्ड में माता-पिता के नाम से जुड़ी विसंगति बताई गई। इस तरह की प्रविष्टियों को सुधार और सत्यापन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

SIR नोटिस का मतलब नाम हटना नहीं
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि SIR के तहत नोटिस मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम स्वतः मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, नोटिस का उद्देश्य रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को दूर करना और जरूरी दस्तावेजों के जरिए विवरण सत्यापित करना है। किसी नाम को हटाने से पहले संबंधित मतदाता को जवाब देने और सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है।
दस्तावेज सत्यापन के बाद तय होगी अंतिम स्थिति
SIR प्रक्रिया में नोटिस पाने वाले मतदाताओं को संबंधित निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आवश्यक जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, सत्यापन के बाद ही संबंधित रिकॉर्ड की अंतिम स्थिति तय होगी। ऐसे में नोटिस सूची में किसी व्यक्ति का नाम सामने आना अपने आप में मतदाता के अपात्र होने या नाम हटने का अंतिम निर्णय नहीं है।
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