Agni-6 Missile : अग्नि-6 की रेंज 12,000 किमी? जानें आखिर क्यों दुनिया के लिए यह बुरी खबर है

भारत की सामरिक शक्ति में होने वाला है अब तक का सबसे बड़ा इजाफा! डीआरडीओ ने अग्नि-6 और हाइपरसोनिक मिसाइलों का पूरा खाका तैयार कर लिया है। 12,000 किलोमीटर की मारक क्षमता और पलक झपकते ही दुश्मन को खाक करने वाली हाइपरसोनिक रफ्तार! क्या सरकार की हरी झंडी मिलते ही भारत बनेगा सुपरपावर?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 30, 2026

Agni-6 Missile : भारत की सामरिक शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने कमर कस ली है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और दुश्मन के दांत खट्टे करने के लिए भारत अब अपनी सबसे घातक मिसाइल ‘अग्नि-6’ और हाइपरसोनिक तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। नई दिल्ली में आयोजित एक सुरक्षा सम्मेलन के दौरान डीआरडीओ के प्रमुख ने भारत की भविष्य की मिसाइल ताकतों का खाका पेश किया।

अग्नि-6: भारत की अगली पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल

डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने स्पष्ट किया है कि अगली पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-6’ के लिए तकनीकी तैयारी पूरी हो चुकी है। अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। कामत ने कहा कि जैसे ही सरकार इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हरी झंडी देगी, डीआरडीओ विकास कार्य शुरू कर देगा। अग्नि-6 को भारत की मौजूदा अग्नि सीरीज की सबसे आधुनिक और लंबी दूरी की मिसाइल माना जा रहा है, जो कई वारहेड (MIRV तकनीक) के साथ दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने में सक्षम होगी।

हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम: चीन और रूस को टक्कर देने की तैयारी

भारत केवल पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘हाइपरसोनिक’ युग में भी प्रवेश कर चुका है। कामत ने बताया कि भारत दो तरह की हाइपरसोनिक मिसाइलों—ग्लाइड व्हीकल और क्रूज मिसाइल—पर काम कर रहा है। इनमें से हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का विकास काफी उन्नत चरण में है और इसका पहला परीक्षण बहुत जल्द किया जा सकता है। यह तकनीक मिसाइल को इतनी तेज गति और लचीलापन प्रदान करती है कि दुनिया का कोई भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक नहीं कर पाएगा।

क्रूज और ग्लाइड मिसाइलों के बीच तकनीकी अंतर

हाइपरसोनिक तकनीक को समझाते हुए डीआरडीओ प्रमुख ने बताया कि क्रूज मिसाइलें स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग करती हैं और अपनी पूरी उड़ान के दौरान संचालित रहती हैं। इसके विपरीत, हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल को शुरुआत में एक रॉकेट बूस्टर द्वारा गति दी जाती है और उसके बाद वह बिना इंजन के वायुमंडल में ‘ग्लाइड’ करती हुई अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है। चूंकि ग्लाइड मिसाइल का परीक्षण अंतिम चरण में है, इसलिए यह भारत के तरकश में सबसे पहले शामिल होगी।

पारंपरिक मिसाइल फोर्स का निर्माण: सामरिक संतुलन की रणनीति

भारत अपनी परमाणु क्षमता के साथ-साथ एक मजबूत ‘पारंपरिक मिसाइल फोर्स’ (Conventional Missile Force) बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसमें 2000 किलोमीटर तक की रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ शॉर्ट और मीडियम रेंज की मिसाइलें शामिल होंगी। इस फोर्स का मुख्य उद्देश्य बिना परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के भी दुश्मन की सामरिक संपत्तियों पर सटीक हमला करना है। यह बल भारत को युद्ध की स्थिति में कई स्तरों पर रक्षा और हमले की सुविधा प्रदान करेगा।

‘प्रलय’ मिसाइल का सेना में प्रवेश: सीमा पर बढ़ेगी ताकत

शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ के बारे में जानकारी देते हुए कामत ने कहा कि यह मिसाइल अब परीक्षण के अंतिम दौर में है। प्रलय मिसाइल को विशेष रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए तैयार किया गया है। इसकी सटीकता और मारक क्षमता इसे युद्ध के मैदान में एक गेम-चेंजर बनाती है। जल्द ही इसे भारतीय सेना के बेड़े में शामिल कर लिया जाएगा, जिससे सीमाओं पर भारत की पकड़ और मजबूत होगी।

मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम: भविष्य का मजबूत भारत

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी इस बात की पुष्टि की है कि भारत एक ‘मल्टी-लेयर’ मिसाइल बेड़ा तैयार कर रहा है। इसका अर्थ है कि भारत के पास छोटी दूरी से लेकर अंतरमहाद्वीपीय दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का जाल होगा। अग्नि-6 और हाइपरसोनिक प्रोग्राम की सफलता न केवल भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करेगी, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में भी बड़ी भूमिका निभाएगी। डीआरडीओ का यह मिशन ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सबसे बड़ी मिसाल बनने जा रहा है।

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