Donald Trump: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया है। ट्रंप के अनुसार, उस चुनाव के दौरान चीन ने न केवल अमेरिकी मतदाताओं के डेटा में बड़ी सेंध लगाई, बल्कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की मिलीभगत से इस जानकारी को राष्ट्रपति और जनता से जानबूझकर छिपाया गया। ट्रंप ने इस पूरे प्रकरण को अमेरिकी लोकतंत्र के इतिहास का सबसे बड़ा सुरक्षा उल्लंघन बताया है।
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चीन ने कैसे चुराया 22 करोड़ वोटर्स का डेटा?
ट्रंप का आरोप है कि चीन ने 18 राज्यों के लगभग 22 करोड़ मतदाताओं का डेटा हैक, चोरी या खरीद लिया था। इसमें मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर और राजनीतिक प्राथमिकताओं जैसी अति-संवेदनशील जानकारियां शामिल थीं। रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने इस कार्य के लिए एक विशेष ‘डेटा एक्सप्लॉइटेशन यूनिट’ का गठन किया था। ट्रंप का मानना है कि इस डेटा का इस्तेमाल मतदाता पंजीकरण में हेरफेर और जो बाइडेन के पक्ष में अवैध मतपत्र तैयार करने के लिए किया गया।
खुफिया एजेंसियों पर ‘डीप स्टेट’ का आरोप
ट्रंप ने एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) और अन्य खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, खुफिया विश्लेषकों ने जानबूझकर राष्ट्रपति की दैनिक ब्रीफिंग से चीन के हस्तक्षेप से संबंधित महत्वपूर्ण रिपोर्टों को हटा दिया या संपादित कर दिया। ट्रंप ने यहां तक कहा कि कुछ अधिकारी अपने स्तर पर एक ‘समानांतर सरकार’ (Shadow Government) चला रहे थे, जिनका एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वह (ट्रंप) चुनाव न जीतें।
ट्रंप क्यों थे चीन के निशाने पर?
ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम का कारण अपनी चीन-विरोधी नीतियों को बताया है। उन्होंने कहा कि चीन उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाना चाहता था क्योंकि उन्होंने चीन पर अरबों डॉलर के टैरिफ (शुल्क) लगाए थे और अमेरिका की सैन्य शक्ति को अत्यधिक मजबूत किया था। खुफिया दस्तावेजों के हवाले से ट्रंप ने बताया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की स्पष्ट नीति थी कि अमेरिका के राष्ट्रपति के समर्थन को कम किया जाए, उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाए या चुनाव में हरा दिया जाए। चीन ने इसके लिए अमेरिकी उद्योग जगत और मीडिया का भी इस्तेमाल करने की कोशिश की, ताकि राष्ट्रपति की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
भविष्य की कार्रवाई और ओबामा युग के दस्तावेज
इस गंभीर खुलासे के बाद ट्रंप ने नेशनल इंटेलिजेंस, न्याय विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियों से तुरंत उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी इस जानकारी को दबाने में शामिल थे, उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने चाहिए। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि उन्हें ओबामा कार्यकाल के दौरान नष्ट किए जाने के लिए भेजे गए कुछ ‘बर्न बैग’ (Burn Bags) मिले हैं, जिनमें मौजूद सामग्री से इस पूरे मामले की कड़ियां जुड़ने की संभावना है।
अंत में, ट्रंप ने 2020 के चुनाव की विश्वसनीयता पर फिर से सवाल खड़े किए हैं, जिसे उस समय ‘इतिहास का सबसे सुरक्षित चुनाव’ बताया गया था। यह दावा अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकता है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता के बीच का विवाद और गहराता दिख रहा है।
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