UNGA President : नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण राजनयिक विमर्श के दौरान, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की स्थिरता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विखंडन की ओर इशारा करते हुए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के प्रति देशों की प्रतिबद्धता को फिर से जीवित करने का आह्वान किया। बेयरबॉक ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद पर अभूतपूर्व दबाव है, जिसे केवल सामूहिक सहयोग के माध्यम से ही कम किया जा सकता है। यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और अनिश्चितता का माहौल है।
ट्रंप के ‘शांति बोर्ड’ की आलोचना: “न्यायपूर्ण शांति शुल्क पर आधारित नहीं हो सकती”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेयरबॉक ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘शांति बोर्ड’ (BOP) की तीखी आलोचना की। ट्रंप ने जनवरी में गाजा संघर्ष जैसे शांति प्रयासों की निगरानी के लिए इस बोर्ड का अनावरण किया था, जिसमें स्थायी सदस्यों से एक अरब अमेरिकी डॉलर के सदस्यता शुल्क की मांग की गई थी। इस पर सवाल उठाते हुए बेयरबॉक ने कहा कि शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र को किसी विशेष कारण से सौंपी गई है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि शांति प्रयासों में शामिल होने के लिए देशों को शुल्क देना पड़े, तो दुनिया के गरीब और छोटे देशों के लिए कभी भी ‘न्यायपूर्ण शांति’ सुनिश्चित नहीं की जा सकेगी।
अकेले चुनौतियां झेलना असंभव: वैश्विक एकजुटता की आवश्यकता
यूएनजीए अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि आज की दुनिया में कोई भी राष्ट्र, चाहे वह आर्थिक या सैन्य रूप से कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, वैश्विक संकटों का सामना अकेले नहीं कर सकता। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक महामारियां और यूक्रेन युद्ध जैसे उदाहरण देते हुए बताया कि इन घटनाओं का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव सीमाओं को नहीं पहचानता। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के बंद होने के खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक सुरक्षा और विकास के तीन स्तंभों—शांति, मानवाधिकार और विकास—को बचाने के लिए सभी देशों को एकजुट होना होगा।
जयशंकर के साथ वार्ता: वैश्विक दक्षिण की आवाज़ और सुधारित बहुपक्षवाद
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एनालेना बेयरबॉक के बीच हुई व्यापक वार्ता में 80 साल पुराने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की आवश्यकता पर विशेष चर्चा हुई। जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि बातचीत के दौरान ‘सुधारित बहुपक्षवाद’ पर जोर दिया गया, जो आज की वास्तविकताओं, विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ (वैश्विक दक्षिण) की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करे। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के संघर्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे जटिल विषयों पर अपने विचार साझा किए। यह वार्ता भारत की उस लंबे समय से चली आ रही मांग का समर्थन करती है जिसमें सुरक्षा परिषद में विस्तार और सुधार की वकालत की गई है।
भविष्य की कूटनीति: बेयरबॉक का आगामी चीन दौरा
बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा की अपनी इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए बेयरबॉक अब चीन की यात्रा पर जाने वाली हैं। 29 और 30 अप्रैल को होने वाला उनका यह दौरा वैश्विक कूटनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वहां भी वह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने और बड़े देशों की जिम्मेदारी पर चर्चा करेंगी। दिल्ली में उनके द्वारा दिए गए बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संयुक्त राष्ट्र को दरकिनार कर कोई भी समानांतर व्यवस्था (जैसे ट्रंप का शांति बोर्ड) वैश्विक स्थिरता के लिए समाधान नहीं बल्कि नई चुनौतियां पैदा कर सकती है।









