Dollar vs Rupee : सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय मुद्रा रुपये ने शानदार शुरुआत की। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में तेजी देखने को मिली और शुरुआती कारोबार में यह 31 पैसे मजबूत होकर 95.12 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की कमजोरी ने भारतीय मुद्रा को मजबूती देने का काम किया।
ट्रंप के फैसले और वैश्विक हालात से रुपये को मिला समर्थन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टालने के संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में तनाव कुछ कम हुआ है। इसका असर डॉलर की मजबूती पर पड़ा और अमेरिकी मुद्रा में गिरावट दर्ज की गई। भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसका फायदा भारतीय रुपये को मिला।
विदेशी निवेश और आरबीआई के समर्थन से बढ़ी करेंसी की ताकत
विदेशी मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय रुपये को मजबूती मिलने के पीछे कई कारण हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से भारतीय बाजार में निवेश, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीतियों ने घरेलू मुद्रा को सहारा दिया है।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन सकारात्मक संकेतों के चलते आने वाले दिनों में रुपये में और सुधार देखने को मिल सकता है।
अंतरबैंक बाजार में 95.12 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंचा रुपया
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में सोमवार को रुपया 95.15 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। इसके बाद इसमें तेजी आई और यह 95.12 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले कारोबारी बंद भाव की तुलना में 31 पैसे की मजबूती को दर्शाता है।इससे पहले शुक्रवार को भी रुपये ने लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की थी। शुक्रवार को रुपया सात पैसे मजबूत होकर 95.43 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट से भी मिला फायदा
छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स सोमवार को 0.17 प्रतिशत गिरकर 99.74 के स्तर पर पहुंच गया। डॉलर में कमजोरी का सीधा फायदा उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को मिला, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी मुद्रा में कमजोरी और वैश्विक बाजार में स्थिरता रुपये की मजबूती के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव करीब 5 प्रतिशत गिरकर 83.66 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में कमी भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल में कमी आने की संभावना रहती है, जिससे रुपये पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
शेयर बाजार में भी तेजी, सेंसेक्स और निफ्टी चढ़े
रुपये की मजबूती और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में भी तेजी देखने को मिली। सोमवार के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 470.06 अंक की बढ़त के साथ 78,564.70 अंक पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी भी 150 अंक बढ़कर 24,532.95 अंक के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।बाजार में तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में की खरीदारी
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 277.48 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। विदेशी निवेश में सुधार को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं तो रुपये में आगे भी मजबूती जारी रह सकती है।
ईरान तनाव कम होने और तेल गिरावट से मिलेगी अर्थव्यवस्था को राहत
बाजार जानकारों के अनुसार, अगर ईरान से जुड़े तनाव में कमी आती है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो भारतीय रुपये को आगे और मजबूती मिल सकती है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा, क्योंकि आयात लागत कम होने से महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।
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