
Diwali 2026: रोशनी, खुशियों और आपसी मेल-मिलाप का त्योहार दीपावली अब नजदीक आ रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले दीपोत्सव की शुरुआत इस बार छह नवंबर से होने जा रही है। धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलने वाले इन त्योहारों को लेकर लोगों में अभी से उत्साह देखने को मिल रहा है।
हालांकि, इस बार तिथियों में बदलाव के चलते दीपावली के पांचों त्योहार लगातार नहीं मनाए जाएंगे। यही वजह है कि रूप चौदस और मुख्य दीपावली की तारीख को लेकर लोगों के बीच कुछ असमंजस भी बना हुआ है। श्रद्धालु जानना चाहते हैं कि किस दिन कौन सा त्योहार मनाया जाएगा और पूजा का सही दिन कौन सा रहेगा।
दीपावली से पहले बाजारों में बढ़ी रौनक
दीपोत्सव की आहट के साथ ही बाजारों में भी त्योहारों वाली रौनक लौटने लगी है। धनतेरस और दीपावली पर खरीदारी को शुभ माना जाता है। ऐसे में लोग अभी से अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं।सर्राफा बाजार में सोने-चांदी के आभूषणों की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ रही है। वहीं, बर्तन बाजार में भी नई-नई डिजाइन के बर्तन सजाए जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक दुकानों पर टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और दूसरे घरेलू सामान की खरीदारी को लेकर ग्राहक पहुंच रहे हैं।

कपड़ों की दुकानों पर भी त्योहार के लिए नए कलेक्शन सजाए गए हैं। व्यापारियों को उम्मीद है कि इस बार दीपोत्सव के दौरान अच्छी बिक्री होगी। दुकानदार भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपनी दुकानों को सजा रहे हैं। कुल मिलाकर त्योहारों से पहले बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है।
धनतेरस से भाई दूज तक कब मनाए जाएंगे दीपावली के त्योहार?
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, इस बार धनतेरस छह नवंबर को मनाई जाएगी। इसके बाद रूप चौदस यानी नरक चतुर्दशी और मुख्य दीपावली की तारीख को लेकर तिथियों का विशेष संयोग बन रहा है। रूप चौदस और दीपावली आठ नवंबर को मनाई जाएगी, हालांकि कुछ लोग सात नवंबर को भी रूप चौदस का पर्व मनाएंगे।

वहीं, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का त्योहार 10 नवंबर को मनाया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 11 नवंबर को भाई दूज का पर्व होगा। इस तरह पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होगी और भाई दूज के साथ इसका समापन होगा।
धनतेरस की तिथि छह नवंबर को, जानें पूजा का समय

धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। परंपरा के मुताबिक, लोग इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और दूसरी नई चीजें खरीदते हैं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, धनत्रयोदशी की तिथि छह नवंबर को सुबह 10 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर सात नवंबर की सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगी।
रूप चौदस और दीपावली की तिथि को लेकर बना विशेष संयोग
इस बार नरक चतुर्दशी यानी रूप चौदस की तिथि सात नवंबर की सुबह 10 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर आठ नवंबर की सुबह 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इसी वजह से कुछ लोग सात नवंबर को भी रूप चौदस मनाएंगे, जबकि ज्योतिषाचार्य के अनुसार आठ नवंबर को इसका पर्व मनाया जाएगा।वहीं, दीपावली की तिथि आठ नवंबर की सुबह 11 बजकर 28 मिनट से शुरू होकर नौ नवंबर की दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। इस दिन घरों और प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। इसके साथ ही लोग घरों को दीपों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाएंगे।
10 नवंबर को गोवर्धन पूजा
दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार इसकी तिथि नौ नवंबर की दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 10 नवंबर की दोपहर 2 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट 10 नवंबर को मनाया जाएगा।इसके बाद भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भाई दूज का त्योहार आएगा। इसकी तिथि 10 नवंबर की दोपहर 2 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर 11 नवंबर की दोपहर 3 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। इस बार भाई दूज 11 नवंबर को मनाई जाएगी।
इस तरह छह नवंबर से शुरू होने वाला पांच दिवसीय दीपोत्सव 11 नवंबर को भाई दूज के साथ संपन्न होगा। हालांकि, तिथियों के अंतर के कारण इस बार त्योहारों के कैलेंडर पर लोगों को विशेष ध्यान देना होगा।











