Dinesh Trivedi: बांग्लादेश में कूटनीति की कमान संभालेंगे पूर्व रेल मंत्री, जानें क्या है पूरा प्लान

केंद्र की मोदी सरकार ने पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ रिश्तों को नई ऊंचाई देने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को ढाका में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त करने का फैसला किया है। 75 वर्षीय त्रिवेदी प्रणय वर्मा की जगह लेंगे। यह नियुक्ति भारत और बांग्लादेश के बीच हालिया कूटनीतिक तनाव को कम करने और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 19, 2026

Dinesh Trivedi: पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कद्दावर नेता दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का अगला उच्चायुक्त (High Commissioner) नियुक्त किए जाने की चर्चा तेज है। एक रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय बाद ढाका में किसी ‘करियर डिप्लोमैट’ की जगह एक राजनीतिक चेहरे को जिम्मेदारी दी जा रही है। दिनेश त्रिवेदी, वर्तमान उच्चायुक्त प्रणय वर्मा का स्थान लेंगे, जिन्हें ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (EU) के लिए भारत का राजदूत नियुक्त किया जा रहा है।

पड़ोसी देशों में कद्दावर राजनीतिक चेहरे औ

बताते चले कि, दिनेश त्रिवेदी की संभावित नियुक्ति भारतीय विदेश मंत्रालय के गलियारों में राजनयिक बदलाव और कूटनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है। 75 वर्षीय त्रिवेदी एक अनुभवी राजनेता हैं, और उन्हें ढाका भेजने का फैसला यह स्पष्ट करता है कि भारत अब पड़ोसी देशों में ‘अच्छे दिनों वाले राजदूतों’ के बजाय प्रभावशाली हस्तियों को तैनात करना चाहता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका में तारिक रहमान सरकार से उनके नाम पर औपचारिक सहमति (Agreemént) मांगी जाएगी। यह कदम पेशेवर राजनयिकों के लिए भी एक संदेश है कि चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक स्थितियों में सरकार अब कड़े फैसले लेने वाले अनुभवी राजनेताओं को राजदूत के तौर पर प्राथमिकता दे रही है।

भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की कवायद

दिनेश त्रिवेदी की यह नियुक्ति एक ऐसे संवेदनशील समय में हो रही है जब भारत और बांग्लादेश अपने तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों और कूटनीतिक दूरियों को पाटने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि शेख हसीना के सत्ता से हटने और तख्तापलट के बाद उपजी स्थितियों, विशेषकर मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान, दोनों देशों के रिश्तों में गिरावट देखी गई थी। अमेरिका समर्थित यूनुस प्रशासन के समय भारत के साथ सहयोग के स्तर में कमी आई थी। अब मोदी सरकार चाहती है कि दिनेश त्रिवेदी जैसे अनुभवी व्यक्तित्व के जरिए ढाका के साथ रणनीतिक साझेदारी और मैत्रीपूर्ण वार्ता को पुनर्जीवित किया जाए।

TMC से BJP तक का सफर

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, दिनेश त्रिवेदी का राजनीतिक करियर बेहद प्रभावशाली रहा है, जो उन्हें इस पद के लिए एक योग्य उम्मीदवार बनाता है। वह यूपीए (UPA) सरकार में रेल मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं। फरवरी 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से इस्तीफा देकर मार्च 2021 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। बंगाल की राजनीति और वहां की जमीनी हकीकत की गहरी समझ होने के कारण, त्रिवेदी बांग्लादेश के साथ सांस्कृतिक और राजनीतिक सेतु बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

गैर-IFS अधिकारियों की नियुक्ति

दिनेश त्रिवेदी की ढाका में तैनाती इस बात का साफ संकेत है कि प्रधानमंत्री मोदी अब महत्वपूर्ण वैश्विक राजधानियों में गैर-आईएफएस (Non-IFS) दूतों और राजनीतिक नियुक्तियों से परहेज नहीं कर रहे हैं। इससे पहले पूर्व सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग सेशेल्स में उच्चायुक्त रह चुके हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि भारत अब उपमहाद्वीप में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कद्दावर नेताओं को मिशन प्रमुख बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। त्रिवेदी की नियुक्ति से यह स्पष्ट हो गया है कि पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसके लिए उच्च स्तरीय राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल होगा।