Dimple Yadav: डिंपल यादव ने राघव चड्ढा को बताया ‘राष्ट्रद्रोही’, दल-बदल पर भड़कीं सपा सांसद

सपा सांसद डिंपल यादव ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राघव चड्ढा और अन्य सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस दलबदल को 'गद्दारी' और 'राष्ट्रद्रोह' के बराबर बताया। डिंपल ने तर्क दिया कि राज्यसभा सांसद पार्टी के भरोसे पर चुने जाते हैं, ऐसे में पार्टी छोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 27, 2026

Dimple Yadav: सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी और सांसद डिंपल यादव ने राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने वाले राघव चड्ढा और उनके साथियों पर हमला करते हुए डिंपल यादव ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या और जनता के साथ विश्वासघात करार दिया है।

राघव चड्ढा पर ‘गद्दारी’ का आरोप

बताते चले कि, समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता डिंपल यादव ने राघव चड्ढा के भाजपा में शामिल होने के फैसले को राजनीतिक विश्वासघात बताया है। उन्होंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जिस पार्टी ने आपको राज्यसभा जैसे उच्च सदन में भेजा और आप पर भरोसा जताया, उसी को मझधार में छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होना राजद्रोह और गद्दारी के समान है। डिंपल यादव के अनुसार, जनता के बीच से चुनकर न आने वाले सांसदों को पार्टी के प्रति और अधिक वफादार होना चाहिए क्योंकि वे सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व के नामांकन के कारण ही संसद तक पहुंचते हैं।

राज्यसभा सदस्यों की नैतिकता पर सवाल

डिंपल यादव ने लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए बागी नेताओं की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने तर्क दिया कि लोकसभा के सदस्य सीधे जनता के वोट से निर्वाचित होते हैं, जबकि राघव चड्ढा जैसे नेता पार्टी के विशेष भरोसे और विधानसभा विधायकों के समर्थन से नामांकित होकर सदन पहुंचते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के अनैतिक दलबदल से देश के लोकतांत्रिक ढांचे को गंभीर नुकसान पहुँचता है। डिंपल ने मैनपुरी में दिए अपने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि पार्टी के सिंबल पर सांसद बनने के बाद सिद्धांतों को तिलांजलि देना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

आम आदमी पार्टी के बागी सांसदों का तर्क

दूसरी ओर, भाजपा का हिस्सा बनने के बाद राघव चड्ढा ने अपने बचाव में ‘आप’ के नेतृत्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। राघव और उनके साथियों—संदीप पाठक, हरभजन सिंह, और स्वाति मालीवाल—ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पष्ट किया कि वे नियमों का पालन करते हुए सदन के अध्यक्ष को सूचित कर चुके हैं। राघव चड्ढा का आरोप है कि आम आदमी पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों और विचारधारा से पूरी तरह भटक गई है। उन्होंने दावा किया कि अब पार्टी में ईमानदार और पुराने कार्यकर्ताओं की कोई जगह नहीं बची है, जिसके चलते उन्हें भाजपा में शामिल होने जैसा बड़ा कदम उठाना पड़ा।

डिंपल यादव का राष्ट्रीय आह्वान

डिंपल यादव के इस ‘राष्ट्रद्रोही’ वाले बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्मा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भरोसे को तोड़ना केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन है। डिंपल यादव ने इस घटनाक्रम को राष्ट्रहित के खिलाफ बताते हुए कहा कि अगर ऐसे ही सांसद पाला बदलते रहे, तो निर्वाचित व्यवस्था पर से लोगों का विश्वास उठ जाएगा। फिलहाल, राघव चड्ढा और अन्य 6 सांसदों के भाजपा में शामिल होने से उच्च सदन का गणित बदल चुका है, लेकिन डिंपल यादव के हमलों ने वफादारी के मुद्दे को मुख्य विमर्श में ला दिया है।