India Hockey Jersey Row: नारंगी जर्सी विवाद पर दिलीप टिर्की की सफाई, आखिर क्यों बदला गया टीम का रंग?

भारतीय हॉकी टीम की नारंगी जर्सी को लेकर उठे विवाद ने खेल जगत में नई चर्चा शुरू कर दी है। पूर्व कप्तान दिलीप टिर्की ने अब इस बदलाव की वजह बताकर कई सवालों के जवाब दिए हैं। आखिर टीम का पारंपरिक रंग क्यों बदला गया, जानिए पूरी कहानी।

India Hockey Jersey Row

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 30, 2026

India Hockey Jersey Row:  एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप 2026 से पहले भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों की नई जर्सी को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। हॉकी इंडिया द्वारा लॉन्च की गई नई नारंगी जर्सी ने खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। भारतीय हॉकी टीम की पहचान लंबे समय से नीली जर्सी रही है, इसलिए रंग में बदलाव को लेकर कई पूर्व खिलाड़ी और राजनीतिक नेता सवाल उठा रहे हैं। इस विवाद के बीच हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप टिर्की ने पहली बार पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बदलाव की वजह स्पष्ट की है।

दिलीप टिर्की ने परंपरा का किया सम्मान

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा कि भारतीय टीम की नीली जर्सी वर्षों से उसकी पहचान रही है और उन्होंने स्वयं भी अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में इसी रंग की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि नीला रंग भारतीय हॉकी की विरासत का हिस्सा है और इस रंग में टीम ने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेले हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जर्सी का रंग बदलना पहली बार नहीं हुआ है। उनके अनुसार, भारतीय टीम पहले भी अलग-अलग अवसरों पर विभिन्न रंगों की जर्सी पहन चुकी है।

पहले भी बदल चुकी है टीम इंडिया की जर्सी

दिलीप टिर्की ने बताया कि वर्ष 2014 में भारतीय हॉकी टीम ने पीले रंग की जर्सी का इस्तेमाल किया था। इसके बाद 2018 में टीम ने हल्के नीले रंग की जर्सी पहनी थी। उन्होंने कहा कि समय-समय पर जरूरत और परिस्थितियों के अनुसार जर्सी के रंग में बदलाव किया जाता रहा है। इसलिए मौजूदा बदलाव को किसी परंपरा को खत्म करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, नई जर्सी का फैसला सोच-समझकर और खिलाड़ियों की राय के आधार पर लिया गया है।

खिलाड़ियों के सुझाव पर चुना गया नारंगी रंग

टिर्की ने बताया कि इस बार जर्सी के रंग को लेकर कोचिंग स्टाफ, सपोर्ट स्टाफ, कप्तान और खिलाड़ियों के बीच विस्तार से चर्चा हुई थी। खिलाड़ियों ने महसूस किया कि नीले रंग की हॉकी टर्फ पर नीली जर्सी पहनने के कारण कई बार मैदान पर खिलाड़ियों को साफ पहचानना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से वैकल्पिक रंगों पर विचार किया गया। चर्चा के दौरान पीले और नारंगी रंग के दो विकल्प सामने आए, जिनमें से आखिरकार नारंगी रंग को चुना गया। उन्होंने कहा कि यह रंग भारतीय तिरंगे का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसी कारण इसे प्राथमिकता दी गई।

विश्व कप के बाद हो सकता है दोबारा विचार

हॉकी इंडिया अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि विश्व कप के बाद खिलाड़ियों या टीम प्रबंधन को यह नई जर्सी पसंद नहीं आती है या उन्हें लगता है कि इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, तो भविष्य में रंग बदलने पर फिर से विचार किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हॉकी इंडिया किसी भी फैसले को स्थायी नहीं मानती और खिलाड़ियों की सुविधा तथा प्रदर्शन को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है। उनका कहना था कि वर्तमान निर्णय पूरी तरह खिलाड़ियों की सलाह और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

विरेन रास्किन्हा और प्रियंका गांधी ने जताया विरोध

नई जर्सी को लेकर पूर्व भारतीय कप्तान विरेन रास्किन्हा ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हॉकी इंडिया ने खेल के विकास के लिए कई अच्छे काम किए हैं, लेकिन भारतीय टीम की पहचान नीली जर्सी रही है और उसे बदलने का कोई ठोस कारण समझ नहीं आता। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर नारंगी रंग चुनने का तर्क क्या है। वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल यूनिफॉर्म बदलने या इतिहास की व्याख्या बदलने से देश की सोच नहीं बदल सकती। उनके बयान के बाद यह विवाद खेल के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि हॉकी विश्व कप 2026 में भारतीय टीम नई जर्सी में कैसा प्रदर्शन करती है और यह बदलाव भविष्य में जारी रहता है या नहीं।

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