Digital e-RCT System: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लॉन्च किया डिजिटल e-RCT सिस्टम, दावा निपटारा होगा तेज पारदर्शी

रेलवे दावों की कछुआ चाल अब बीते वक्त की बात होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'डिजिटल e-RCT' पोर्टल लॉन्च कर सिस्टम में क्रांति ला दी है। अब दुर्घटना दावों की फाइलें धूल नहीं फांकेंगी, बल्कि एक क्लिक पर प्रोसेस होंगी। क्या यह सिस्टम पीड़ितों को समय पर न्याय दिला पाएगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 26, 2026

Digital e-RCT System: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे में मुआवजा दावों की प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। भारतीय रेलवे ने इलेक्ट्रॉनिक रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल (e-RCT) नामक नई डिजिटल प्रणाली की शुरुआत की है। यह प्लेटफॉर्म रेलवे दुर्घटनाओं, अप्रत्याशित घटनाओं, माल की क्षति और किराया विवाद जैसे मामलों के निपटारे को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाएगा। पहले दावा दायर करने से लेकर अंतिम निर्णय तक लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया और कागजी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की काफी खपत होती थी। अब डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी।

ऑनलाइन दावा दर्ज करने की सुविधा

e-RCT सिस्टम पूरी तरह ऑनलाइन मोड में कार्य करेगा। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी कोने से, किसी भी समय अपना दावा ऑनलाइन दर्ज कर सकता है। इसके लिए एक व्यवस्थित चेकलिस्ट आधारित जांच प्रक्रिया उपलब्ध कराई गई है, जिससे आवेदन में त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है। आवेदक आवश्यक दस्तावेज डिजिटल रूप से अपलोड कर सकते हैं। केस दर्ज होते ही स्वतः केस अलोकेशन की सुविधा है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है। नोटिस की डिजिटल कॉपी भी संबंधित पक्षों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी।

ई-हियरिंग से समय और संसाधनों की बचत

इस नए प्लेटफॉर्म में ई-हियरिंग यानी ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा भी जोड़ी गई है। इससे पक्षकारों को बार-बार अदालत में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। खासतौर पर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था बेहद लाभकारी सिद्ध होगी। डिजिटल माध्यम से सुनवाई होने पर समय की बचत होगी और मामलों का निपटारा तेजी से संभव हो सकेगा। रेलवे का मानना है कि इससे लंबित मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।

फाइलिंग से फैसले तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल

e-RCT प्लेटफॉर्म पर केस की पूरी प्रगति एक ही स्थान पर देखी जा सकेगी। दावा दायर करने से लेकर अंतिम आदेश जारी होने तक की सभी जानकारियां ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और आवेदकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अधिकारियों के अनुसार यह प्रणाली न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली को मजबूत करेगी, बल्कि आम जनता के बीच भरोसा भी बढ़ाएगी। डिजिटल रिकॉर्ड से जवाबदेही सुनिश्चित होगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।

डिजिटल सुरक्षा और प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर जोर

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डिजिटल सुरक्षा और इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज में विश्वास बनाए रखना बेहद आवश्यक है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपने यहां प्रसारित होने वाले कंटेंट की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना प्लेटफॉर्म्स का कर्तव्य है। यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है तो संबंधित संस्थाओं को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

AI और सिंथेटिक कंटेंट पर सख्त रुख

तेजी से बदलते डिजिटल परिवेश और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग को देखते हुए मंत्री ने सिंथेटिक कंटेंट को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसके चेहरे, आवाज या व्यक्तित्व का उपयोग कर कंटेंट तैयार करना उचित नहीं है। यह निजता और विश्वास दोनों के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से अपील की कि वे समाज की मूलभूत आवश्यकताओं को समझें और जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करें। आने वाले समय में इस दिशा में सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं।

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