Dharmendra Pradhan Resignation: हाल ही में देश की राजनीति और शिक्षा जगत में एक बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों, देशव्यापी छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है और सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के सामने इस बात की जानकारी साझा की है। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनके लिए किसी भी राजनीतिक पद या व्यक्तिगत सम्मान से कहीं अधिक देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है।
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शिक्षा क्षेत्र में चार दशकों का समर्पण
धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चिट्ठी में उल्लेख किया है कि वह पिछले चालीस वर्षों से अधिक समय से छात्र जीवन, शिक्षक समुदाय और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पूरी तरह समर्पित रहे हैं। उनका हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही किसी भी सशक्त राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती है। इसी विजन के साथ उन्होंने मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी और हमेशा शिक्षा को पारदर्शी तथा निष्पक्ष बनाने का प्रयास किया।
NEET-UG विवाद और सरकार की ओर से उठाए गए कदम
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
पत्र के अनुसार, परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आते ही सरकार ने त्वरित और सख्त कार्रवाई की थी। धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा:
- सीबीआई जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई।
- पुनर्परीक्षा का निर्णय: छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रभावित परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया।
- भविष्य के सुधार: अगले वर्ष से NEET परीक्षा को पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित करने की घोषणा की गई, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न बचे।
20 लाख से अधिक छात्रों के लिए सफल परीक्षा का आयोजन
शिक्षा मंत्री ने बताया कि 20 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के भविष्य को सुरक्षित रखते हुए उनकी परीक्षा को निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के आपसी सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा का सफल आयोजन किया गया। इसके बाद 16 जुलाई को जब परिणाम घोषित किए गए, तो देश के दूर-दराज के क्षेत्रों से आए गरीब और वंचित परिवारों के कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की। हालांकि, इसके बावजूद कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा छात्रों को लगातार गुमराह करने के प्रयास किए गए, जिससे उन्हें भारी मानसिक कष्ट और दुख पहुंचा।
पद छोड़ने का मुख्य कारण और भविष्य का संकल्प
पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से अत्यधिक व्यथित होकर उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने साफ किया कि यह मामला उनके व्यक्तिगत सम्मान का बिल्कुल नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का है। वह यह नहीं चाहते थे कि छात्र कानूनी विवादों और राजनीतिक टकराव के चक्रव्यूह में उलझकर अपने मुख्य उद्देश्य से भटक जाएं।
चिट्ठी के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन, मंत्रिपरिषद के सभी सहयोगियों तथा शिक्षा मंत्रालय के तमाम अधिकारियों व कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि सार्वजनिक जीवन में वह आगे भी भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करते रहेंगे।










