Dharmendra Pradhan Resignation: मुरली मनोहर जोशी का बड़ा बयान- ‘देर आए दुरुस्त आए’, छात्रों को दी बधाई

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच मुरली मनोहर जोशी का 'देर आए दुरुस्त आए' वाला बयान तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। उन्होंने छात्रों को बधाई भी दी। आखिर इस बयान के पीछे क्या संदेश है, इसका राजनीतिक असर कितना बड़ा हो सकता है, जानिए पूरी रिपोर्ट में।

Dharmendra Pradhan Resignation

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 26, 2026

Dharmendra Pradhan Resignation: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने शुक्रवार को धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे का खुले तौर पर स्वागत किया है। उन्होंने इसे नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर देशभर में चल रहे भारी विवाद और विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बेहद जरूरी लेकिन थोड़ा विलंब से उठाया गया कदम करार दिया है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस इस्तीफे पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ नेता जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि यह फैसला भले ही थोड़ा देर से आया हो, लेकिन बिल्कुल दुरुस्त और सही वक्त पर उठाया गया कदम है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे संवेदनशील मामले पर अब और भी त्वरित, कड़े और समयोचित निर्णय लेंगे, जिससे देश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था को जल्द से जल्द दूर किया जा सके।

छात्र आंदोलन की सराहना और शांति बनाए रखने की अपील

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पूर्व शिक्षा मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने देश भर की सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने वाले सभी छात्र-छात्राओं की जमकर तारीफ की और उन्हें इस अनुशासित संघर्ष के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि छात्रों ने जिस संयम और शांति का परिचय देते हुए इस बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन को आगे बढ़ाया है, वह वास्तव में सराहनीय है। मुरली मनोहर जोशी ने विश्वास जताया कि अब देश के शैक्षणिक संस्थानों और शिक्षा जगत में बहुत जल्द शांति और सुव्यवस्था की पुनः स्थापना होगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोर दिया कि देश के मेहनतकश युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने, अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण और करियर में तरक्की के लिए सरकार द्वारा पर्याप्त और बेहतर अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए, ताकि उनका मनोबल हमेशा ऊंचा बना रहे।

नीट विवाद और राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

देशभर में लगातार हो रहे तीव्र विरोध प्रदर्शनों और विपक्षी दलों के बढ़ते भारी राजनीतिक दबाव के आगे आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से हटना पड़ा। इस सियासी हलचल के बाद केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य छात्र संगठनों से उच्च स्तरीय बातचीत की। सरकार द्वारा उनकी कई प्रमुख और जरूरी मांगें मान लिए जाने के बाद पार्टी ने अपना आंदोलन आधिकारिक रूप से वापस लेने का बड़ा ऐलान कर दिया। इन मानी गई मांगों में मुख्य रूप से प्रभावित छात्रों के लिए उचित मुआवजे का भरोसा देना, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों और एफआईआर को वापस लेना तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर शिक्षा व परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर गंभीर चर्चा करना शामिल था।

पत्र लिखकर धर्मेंद्र प्रधान ने साझा किए इस्तीफे के कारण

नीट पेपर लीक मामले को लेकर उपजे गंभीर हालात और राजनीतिक सरगर्मी के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए अपने आधिकारिक त्यागपत्र पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने मौजूदा छात्र-हित से जुड़े हालातों और देश की परिस्थितियों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए यह बड़ा फैसला लिया है। एक्स पर अपने इस पत्र को साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि उन्होंने इस विवाद के पहले दिन से ही नीट पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है। उन्होंने अपने पत्र में इस बात पर भी विशेष बल दिया कि यह प्रकरण उनके लिए कभी भी कोई “निजी इज्जत या प्रतिष्ठा का मामला” नहीं रहा है, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक अति संवेदनशील विषय है।

राष्ट्रहित और छात्र भविष्य को सर्वोपरि मानकर छोड़ा पद

अपने विदाई पत्र में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विस्तार से बताया कि उन्होंने छात्रों के वृहद हित में अपने पद को त्यागना उचित समझा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश का युवा वर्ग किसी भी प्रकार के भ्रम और भटकाव के जाल में न फंसे। पत्र में उन्होंने इस बात की भी गहरी चिंता जताई कि जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में चल रहे प्रदर्शनों का फायदा उठाकर कोई भी राष्ट्रविरोधी ताकतें (एंटी-नेशनल एलिमेंट्स) देश की शांति और एकता को खंडित न कर सकें। उन्होंने लिखा कि देश एकजुट रहे, भारत के युवा किसी भी अनावश्यक कानूनी पचड़े या विवादों में न उलझें और पूरी तरह से अपनी पढ़ाई तथा अपने करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें, इसी उद्देश्य से उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौंपा है।

राष्ट्रपति ने स्वीकार किया इस्तीफा, प्रह्लाद जोशी को नया प्रभार

धर्मेंद्र प्रधान द्वारा भेजे गए इस त्यागपत्र को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही देश की प्रशासनिक व्यवस्था और शिक्षा मंत्रालय के सुचारू संचालन को बनाए रखने के लिए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। अब नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के सामने देश की मौजूदा परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, छात्रों के टूटे भरोसे को बहाल करने और आने वाले दिनों में निष्पक्ष परीक्षाएं आयोजित कराने की एक बहुत बड़ी और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी आ गई है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

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