Dharmendra Pradhan Resign: कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी का बड़ा हमला, बोले- ‘मोदी सरकार का कौरवी शासन’

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "यह मोदी सरकार के कौरवी शासन का अंत और विपक्ष के रूप में पांडवों का उदय है।" उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

Dharmendra Pradhan Resign

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 26, 2026

Dharmendra Pradhan Resign: नीट पेपर लीक मामले और लगातार हो रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में उपनेता विपक्ष प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इस राजनीतिक घटना को महाभारत के प्रसंग से जोड़ते हुए इसे तानाशाही और अन्याय के अंत की शुरुआत बताया है।

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“यह 12 साल के कौरवी शासन का अंत है”

प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए तीखे शब्दों में कहा कि आज का दिन देश की राजनीति में एक नए परिवर्तन का प्रतीक है। उन्होंने बयान देते हुए कहा, “यह मोदी सरकार के कौरवी शासन का अंत और विपक्ष के रूप में पांडवों का उदय है।” उन्होंने आगे कहा कि देश के युवाओं के संघर्ष, राहुल गांधी के नेतृत्व और संसद के भीतर-बाहर खड़े हुए एक मजबूत विपक्ष की ताकत के बलबूते पर, 12 साल के इस कथित ‘कौरवी शासन’ के बाद अब ‘पांडवों की वापसी’ हो चुकी है।

तानाशाही और जनविरोधी नीतियों पर तीखा प्रहार

कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार की नीतियों और फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में देश की जनता और व्यवस्था को तानाशाही के साये में चलाया गया है।

नारी शक्ति का अपमान: प्रमोद तिवारी ने कहा कि चाहे दिल्ली की सड़कों पर बेटियों और नारी शक्ति का अपमान हुआ हो, या देश के भविष्य यानी युवाओं के करियर के साथ खिलवाड़ किया गया हो, सरकार ने हर मोर्चे पर जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया।

दमनकारी नीतियां: उन्होंने तानाशाही लाठियों के प्रहार का जिक्र करते हुए कहा कि जब-जब देश में जनता और महिलाओं का अपमान किया जाता है, तब-तब इतिहास में बड़ा बदलाव अवश्य आता है।

कुरुक्षेत्र का मैदान: सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि अब ‘कुरुक्षेत्र का मैदान सज चुका है’ और देश के संसाधनों तथा व्यवस्था को प्रभावित करने वाली इस बर्बर सरकार का पतन अब निश्चित हो गया है।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को केवल एक मंत्री का त्यागपत्र नहीं, बल्कि देश भर के छात्र-युवाओं के संघर्ष की बड़ी जीत माना जा रहा है।

विपक्ष का साझा रुख: कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), एआईएमआईएम और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) जैसे प्रमुख दलों के नेताओं ने इसे देश के युवाओं के आंदोलन का परिणाम बताया है।

भविष्य की मांगें: विपक्षी नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यह इस्तीफा केवल एक शुरुआत मात्र है। सरकार को अब परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल सुधार करने होंगे।

कड़े कानून और जवाबदेही: विपक्षी दलों ने मांग की है कि पेपर लीक मामलों से निपटने के लिए बेहद सख्त कानून लागू किए जाएं, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की जवाबदेही तय हो और प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं।

धर्मेंद्र प्रधान के इस इस्तीफे के बाद से कांग्रेस खेमे में भारी उत्साह देखा जा रहा है और विपक्षी दल इसे आने वाले राजनीतिक बदलाव की एक मजबूत बानगी के रूप में देख रहे हैं।

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