
Uttarakhand News: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 30 अक्टूबर 2026 को देहरादून के होटल फेयरफील्ड में आयोजित ‘देवभूमि से विकास संवाद कॉन्क्लेव’ में राज्य सरकार की विकास प्राथमिकताओं और उपलब्धियों को सामने रखा। इस दौरान उन्होंने युवाओं को रोजगार देने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, पर्यटन को बढ़ावा देने, पलायन रोकने और सीमावर्ती गांवों के विकास जैसे अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को आगे बढ़ाने के लिए रोजगार और विकास के अवसरों को राज्य के भीतर ही मजबूत करना जरूरी है।
35 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से ही खाली सरकारी पदों को भरना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। उस समय प्रदेश में करीब 24 हजार पद रिक्त थे। सरकार ने इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की और अब तक 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है।
पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और नकल विरोधी कानून पर जोर
धामी ने कहा कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सख्त नकल विरोधी कानून बनाया है। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था से योग्य अभ्यर्थियों को बिना सिफारिश और भ्रष्टाचार के अपनी मेहनत तथा मेरिट के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।
गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को नौकरी और रोजगार के लिए अपने घर-गांव से दूर न जाना पड़े। इसके लिए पर्यटन, होमस्टे, होटल, टैक्सी संचालन, बागवानी और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। इससे पर्यटन से जुड़े कारोबार और स्थानीय सेवाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण
महिला सशक्तिकरण पर बात करते हुए धामी ने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण और विकास में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। इसी योगदान को देखते हुए राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अधिक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

तीन लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार और उद्यमिता से जुड़ी हैं। इन समूहों के स्थानीय उत्पादों की मांग देश और विदेश में बढ़ रही है। धामी ने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड का जिक्र करते हुए कहा कि यह उत्तराखंड के पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर रहा है। इससे महिलाओं के बनाए उत्पादों को नई पहचान और बाजार मिलने का रास्ता खुल रहा है।
सीमावर्ती गांवों के विकास पर सरकार का फोकस
धामी ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने माणा गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि अब इसे देश के आखिरी गांव के बजाय पहले गांव के रूप में पहचानने की सोच विकसित की जा रही है। इससे सीमावर्ती इलाकों में सड़क, बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
पर्यावरण और सांस्कृतिक पहचान बचाने की भी चुनौती
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने की जरूरत बताई। धामी ने 5 नवंबर 2021 को केदारनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विश्वास का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की महिलाओं की मेहनत, संकल्प और भागीदारी इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी।
Uttarakhand News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की केदारनाथ यात्रा स्थगित, एक











